...उनको तो रोजगार, हम फिरे बेरोजगार।
खरी खोटी...आईबीखान की कलम से
जैतारण इलाके के निम्बोल ग्राम के निकट संचालित एक सीमेँट इकाई प्रबन्धको के द्वारा जैतारण इलाका ही नही बल्कि पाली जिले के किसी भी बेरोजगार डिग्रीधारी युवाओ को केवल इसलिए अपने यहाँ रोजगार पर नही लगाया जा रहा है कि वे स्थानीय है।यह विचित्र बात है कि अपने इलाके से किसानो की जमीनो को कोडियो के दामो पर खरीदकर यहाँ प्लान्ट लगाकर करोडो की कमाई करने वाले उधोगपति जैतारण इलाके के युवाओ की उपेक्षा करते आ रहे है लेकिन जनप्रतिनिधि अपने इलाके के डिग्रीधारी बेरोजगारो को वहाँ रोजगार दिलाने की दिशा मे प्रबन्धको पर दबाब तक नही बना रहे है।एक नियम के मुताबीक किसी भी इकाई लगाने वालो को स्थानीय लोगो को प्राथमिकता के साथ रोजगार दिलाने के अलावा आस पास के क्षेत्रो मे सामाजिक सरोकार के कार्य करने अनिवार्य होता है लेकिन क्या कयामत है यहा पर की इस इकाई मे सभी श्रमिक बाहरी लगे हुए है,मै बाहरी लोगो का विरोध नही करता पर स्थानीय को तो रोजगार देना चाहिए!माननीय जनप्रतिनिधिजी स्थानीय को रोजगार दिलाने की पहल करे,जैतारण इलाके मे प्रतिभावान युवाओं की यहां कमी नहीं है,लेकिन उन युवाओं को केवल इस आधार पर ही रोजगार पर नहीं लगाया जा रहा है कि वे स्थानीय है।प्लांट प्रबंधक यदि किसी अपराधी प्रवृति वाले लोगों को अपने यहां रोजगार नहीं दे यहां तक तो जायज है किन्तु जैतारण क्षेत्र के दक्षताधारी युवाओं को केवल इसलिए अपने यहां रोजगार पर नहीं लगना इस बात को अँकित करता है की उनकी नजरों मे स्थानीय युवा अपराधी है...! उल्लेखनीय है कि इस प्लांट मे स्थानीय लोगों को रोजगार देने की माँग को लेकर कई बार लोगों ने आन्दोलन भी किये, मगर नतीजा आजतक कुछ नहीं निकला।यही नहीं काँग्रेस के शासनकाल मे जब दिलीप चौधरी सँसदीय सचिव थे तब भी यहां के बेरोजगार लोग यहां पर रोजगार दिलाने की माँग करते थे और आज जब जैतारण के विधायक श्री सुरेन्द्र गोयल राज्य सरकार मे काबिना मँत्री है,लेकिन बेरोजगार डिग्रीधारी युवाओं की यह माँग पूरी नहीं हो पा रही है।ऐसी स्थिति मे बार बार मन मे एक ही सवाल उठ रहा है की स्थानीय होने की शायद उन युवाओं को यह सजा मिल रही है...9413063300
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