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...कभी नजरे इधर भी इनायत करो लो मंत्रीजी


जैतारण(आईबीखांन)।
प्रदेश के सियासी हलको में अपना अलग मुकाम रखने वाले जैतारण शहर की दशा और दिशा इन दिनो बिगड़ी हुई है,तो भला शहर का सबसे बड़ा चिकित्सालय इस दशा में यह पीछे कैसे रह सकता है।लम्बे समय से पाठको एवं शहर के जागरूक लोगो की यह मांग रही की मे इस चिकित्सालय की माकूल व्यवस्थाओ के बारे में लिखू...!जैतारण के इस चिकित्सालय के भवन के अलावा यहां सबकुछ ठीक नही है।इलाके का सबसे बड़ा चिकित्सालय होने के कारण यू तो यहां हरदम मरीज है की भीड़ लगी रहती है,पर यहां मरीजो का समय पर इलाज करने वाले चिकित्सको की कमी हमेशा खलती ही रहती है।माननीय मंत्रीजी के गृह शहर का चिकित्सालय होने के कारण यह लाजमी है कि लोग इस चिकित्सालय मे माकूल चिकित्सा व्यवस्था की तो उम्मीद करते होगे,लेकिन यहां सुविधाओ का आलम तो देखिए,वर्षो से यहां
सोनोग्राफी की मशीन धूल फाक रही है पर इसे चलाने वाला नहीं है।इस चिकित्सालय मे बेड तो है,लेकिन साफ सुथरे बिस्तर नहीं है,चिकित्सालय प्रशासन ने इस चिकित्सालय को साफ सुथरा बनाये रखने के लिए बकायदा सफाई व्यवस्था का ठेका दे रखा है,लेकिन इस अस्पताल के शौचालय एवं मूत्रालय अपनी कहानी खुद अपनी स्थिति बयां कर रहे है।राजकिय रेफरल चिकित्सालय के अनरूप यहां मामूली हादसो के शिकार होने वालो को कुछ ही देर में रेफर टू हाई सेन्टर की राह दिखाने मे चिकित्सक तनीक भी देर नही करते है। चिकित्सालय मे पार्किग व्यवस्था का तो कोई जबाब ही नही है,यहां अस्त व्यस्त खड़े रहने वाले वाहनो के कारण एम्बुलेस एवं अन्य रोगी वाहनो को मरीजो को लाने एवं ले जाने मे मुश्किलो का सामना करना पड़ता है,उपर से यहां आये दिन दुपहिया वाहन चोरी अलग से होते है।
चिकित्सालय के आगे ठेले वाले अतिक्रमण करके बैठे लोगो के कारण एम्बुलेंस खड़ी भी नही हो सकती और यदि कर भी दे तो  अमर्जेंसी में वहां निकल नहीं सकती...! चिकित्सालय के बहार का नजारा अपनी अलग ही तस्वीर दिखाता है।चिकित्सालय मे  इलाज के नाम पर जो कुछ होता है वो यहां आने वाले मरीजो से बेहतर और कोई बता नही सकता,लेकिन एक कड़वी सचाई यह भी है कि यहां महिलाओ के प्रसव बिना सुविधा शुल्क के नही होता,इसकी तस्दीक करनी होतो यहां प्रसव करा चुकि महिलाओ के परिजनो से कर सकते है।अपन को चिकित्सको की निजी प्रेक्टीश पर कोई आपत्ती नही है...!लेकिन चिकित्सालय के समय मे तो मुझे नही लगता यह करना लाजमी है।बात व्यवस्थाओ की चल रही है तो लगे हाथ रात्रिकालीन व्यवस्था का भी जिक्र हो जाय,इस चिकित्सालय मे रात्री सेवाएं नही के बराबर है।चलते चलते पूर्व संसदीय सचिव दिलीप चौधरी का ही लगे हाथ एक उदारण क्या,मे उनके कार्यकाल का गवाह हूं जब वे रात को इस चिकित्सालय का औचक निरीक्षण करने कई बार आते जाते रहते थे,लेकिन अब ऐसा नही है।माननीय जलदाय मंत्रीजी से एक कलमकार के रूप मे थोड़ा आग्रह करूगां की कभी कभार आप भी इस चिकित्सालय पर अपनी नजरे इनायत कर लिया करो।वैसे आपके आवास से यह चिकित्सालय चंद कदम पर ही स्थित है...9413063300

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