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कई इन नालो की तरह हश्र न हो जाए इन सीवरेज लाईनो का...!

जैतारण(आईबीखांन)।
जैतारण नगरपालिका परिक्षेत्र मे पिछले कई दिनो से चल रहे सीवरेज कार्यो मे बरती जा रही तकनीकी खामियो एवं बिना उच्च तकनीकी अधिकारीयो की देखरेख मे आनन फानन मे बिछाई जा रही यह सीवरेज की लाईन क्या भविष्य में सफल होगी या नही,यह सवाल शहर के हर शख्स के जहन मे उठने लगे है।सवाल इसलिए उठ रहे है की अपनी निकाय ने अबतक शहर में गंदे पानी की निकासी के लिए जिन जिन नालो को तामीर किये गये उनकी हालत कुछ ऐसी ही है जिसमे गंदा पानी न तो आगे निकलता है और न ही यह नाले भौतिक रूप से सफल है।लगभग 45 करोड़ की लागत से शहर मे जो सीवरेज का काम चल रहा है,उसकी देखरेख मात्र ठेकेदार के अपने ही किराये के तकनीकी अधिकारी लगे हुए है,मुझे नही लगता की वे इस कार्य मे कोई तकनीकी खामिया निकालते होगे।अव्वल तो होना यह चाहिए की करोड़ो की लागत के इस पायलट प्रोजेक्ट के कार्य की निगरानी उच्चतम तकनीकी अधिकारीयो को नियमित रखनी चाहिए थी,मगर जैतारण नगर पालिका ने तो इसकी तकनीकी देखरेख का जिम्मा उनको दे रखा है जिनको इसका अनुभव ही नही,या यू कहू की जो जीप चलाना ही जानता हो उसे हवाई जहाज चलाने के लिए दे दी गई है।मुझे हैरत इस बात की हो रही है की इस पायलट प्रोजेक्ट की जिनको तकनीकी देखरेख करने की जिम्मेदारी सरकार ने दी है वे कभी मौके पर आए भी नही होगे,आखिर इतनी लापरवाही क्यो...!मे शुरू से ही यह लिखता आ रहा की हम सीवरेज के विरोधी नही है,मगर सीवरेज के बेतरतीब कार्यो के हम विरोधी है।जैतारण के एक तकनीकी अधिकारी की माने तो जैतारण मे वर्तमान मे बिछाई जाने वाले पाईप लाईन को बेतरतीब रूप से बिछाया जा रहा है,उदारण के तौर मे इन सीवरेज वालो ने शहर मे जगह जगह जो हौदीया तैयार की है उसे देखकर कोई भी यह अनुमान लगा सकता है की इनका यह कार्य कैसा होगा।मुझे तो यह संदेह है की कई इस सीवरेज की दशा भी उन नालो जैसी न हो जाय जो आम दिनो मे नही,मगर बरसात मे ही चलते है चलते है,मेरी बात पर यकिन नही हो तो एकबार अपनी पोश काँलोनी के नालो की हालत आकर देख लो जहां यह नाले ऐसी ही तकनीकी अधिकारीयो की प्रमाणिक तकनीक रिपोर्ट के बाद केवल बरसात के दिनो मे ही काम आते है,क्या तकनीक है इन तकनीकी अधिकारीयो के पास जिनकी बिना देखे तकनीक को प्रमाणिक करने की कला को दाद देनी ही पड़ेगी,अब यही कला सीवरेज के कार्यो में भी अपनाई जा रही है जहां उच्च तकनीकी अधिकारी रस्मो रिवायत अपनाकर सीधे जयपुर से ही इस कार्यो की गुणवत्ता का प्रमाण दे रहे है,यदि यही सिलसिला जारी रहा तो इस अनाड़ी कलमकार की यह बात आज गांठ बाधकर रख लेना,इस सीवरेज का भी यही हश्र होगा जो शहरी नालो का हो रखा है।लिखने को तो बहुत कुछ है मगर कड़वी बाते हर किसी को हजम नही होगी,वैसे भी अपन कलम से अमृत कम,अमूमन जहर ही उगलती है,बहुत कम ही ऐसे है जिनको मेरा यह जहर अमृत लगता है,क्योकि इस घोर कलयुग मे अब न तो वे शिव है न ही वो मीरा है जो जहर पीकर अमृत बना सके...! चलते चलते उन जिम्मेदारो से भी तवज्जो चाहूगां की वे इस अनाड़ी की बात पर तनिक ध्यान दे वरना हमे तो इसका भविष्य अभी से दिखने लगा है...!9413063300

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