जैन संतो का वर्षावास-चातुर्मास पर विशेष....
आया चौमासा जगाने मोह नींद से
गुरु अमृत शिष्य - डॉ वरुण मुनि
जैतारण...
अहिंसा धर्म की पालना के लिए केवल जैन धर्म में ही नही अन्य सभी धर्म परम्पराओं में सन्त महात्माओं को चार महीने तक एक स्थान में रहकर धर्म आराधना करने का विधान है । इसके पीछे का प्रमुख कारण है वर्षा ऋतु से उत्पन्न जीवों की रक्षा करना । भगवान महावीर की कल्याणकारी वाणी आगम ग्रन्थ में कहा है कि - संसार मे स्थित सभी प्रकार के प्राणी (तिर्यंच - मनुष्य) की आत्मा को अपनी आत्मा के समान समझो ।
इस कल्याणकारी वाणी को धारण करते हुए जैन मुनि चार माह तक एक स्थान में प्रवास कर अपनी आत्म साधना में लीन होते हैं ।
*चातुर्मास का समय*
श्रावण , भाद्रपद , आश्विन और कार्तिक ये चार महीने चातुर्मास के होते हैं । कई परम्पराओं में मुख्य रूप से श्रावण और भाद्रपद को महत्व देते हुए केवल दो माह का ही चातुर्मास करते है । वैसे एक दृष्टिकोण से देखा जाय तो इन दो माहों में ही सभी प्रकार के आध्यात्मिक पर्व आते हैं ।
*क्यों करते है मुनिवर चातुर्मास*
जैन मुनि के पंच महाव्रतों में प्रमुखता अहिंसा धर्म को दिया गया है । बिना अहिंसा भाव के कोई भी व्यक्ति तामसिक वृतियों से छूट नही सकता है । अहिंसा की भावना को पालने वाले मुनि कदापि मन वचन काया से नही चाहते हैं कि उनके द्वारा सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवों की भी हिंसा हो और चातुर्मास काल में तो कभी नही देखे गए ऐसे जीवों की भी उत्पत्ति होती है और हमारे चलने उठने बैठने आदि समस्त हलन चलन गमनागमन क्रिया से उन जीवो की विराधना सम्भव है इसलिए मुनि चार मास तक शुद्ध स्थान की गवेषणा कर ध्यानस्थ होते है ।
*चातुर्मास में क्या होता है*
चातुर्मास का मुख्य लक्ष्य है आत्म जागरणा । जो व्यक्ति काम क्रोध मोह लोभ के मद में सोये पड़े हैं उन्हें जगाकर स्वयं की खोज में लगाना ही चातुर्मास का ध्येय होता है । चातुर्मास में अनेक महान सन्तों की जन्म जयंती , पर्युषण महापर्व आदि उत्सवों के माध्यम से भी अपनी आत्म जागृति के उद्देश्य की पूर्ति में साधक बनते हैं। और इसके साथ ही मुनियों की ओजस्वी वाणी से धर्म दर्शन के ज्ञान से व्यक्ति को स्वयं का बोध होता है ।
कई सन्त महात्मा संस्कार शिविर , योग शिविर , ज्ञान प्रतियोगिता , लेखन प्रतियोगिता , आगम वांचन , जाप अनुष्ठान आदि क्रियाओं के माध्यम से भी धर्म से जोड़ने के लिए कार्यरत रहते हैं । इन क्रियाओं से व्यक्ति की आध्यात्मिक शक्ति के साथ साथ शारीरिक एवं मानसिक शक्ति की भी प्रचुर वृद्धि होती है ।
*चातुर्मास से प्रकृति में भी होता है बदलाव*
चातुर्मास के समय वर्षा ऋतु होने से जगत में रही जितनी भी वनस्पतियां है वे जल धारा को पाकर स्वयं को भी हरित करती है साथ ही मानव मन को भी हरित करती है । जल धारा को पाकर प्रकृति में भी शुद्ध वायु का संचार होता है और प्रदूषण का भी नाश होता है । सारे वन्य प्राणी वर्षा ऋतु को पाकर नृत्य करते हैं ।
*प्रेम को लाता है चातुर्मास*
चातुर्मास हम सभी को एक छत्र के नीचे लाने का प्रयास करता है ।
चातुर्मास के आयोजन भाई भाई का वैर , सास बहु की अनबन , पिता पुत्र की असमंजसता , सामाजिक विकृति , पारिवारिक अशांति आदि समस्त कलहों को मिटाकर एकता , संघटन , भाईचारा , प्रेम आदि से ओत प्रोत कर देता है
*विश्व शांति का सन्देश लाता है - चातुर्मास*
चातुर्मास के चार महीने तक धर्म गुरु हमे धर्म से बांध कर रखते है इस निमित से हम सब संसार की पंचायतियों से काफी दूर रहते है जिससे शांति बनी रहती है ।साथ ही अनेक प्रकार की मन्त्रों की साधना से पूरे विश्व में शुद्ध वातावरण का आभा मण्डल प्रस्फुटित होता है । चहुं ओर शांति का साम्राज्य छा जाता है । व्यक्ति जितना चातुर्मास में जुड़ा रहेगा वो उतना ही पाप क्रियाओं से निवृत होता रहेगा ।
*तप के लिए सर्वोत्तम समय*
सभी धर्मों में तप का भारी महत्व है । ग्रीष्म ऋतु में तप होता नही , शीत ऋतु में भूख सहन होती नही ,परन्तु चातुर्मास का समय ऐसा है , इसमें ना गर्मी ज्यादा ना सर्दी ज्यादा शारीरिक रुप
से पूर्ण अनुकूलता रहती है अतः तप का सर्वोत्तम समय चातुर्मास काल होता है ।
*सन्त सान्निध्य से अज्ञानता का नाश*
चातुर्मास में बहने वाली धर्म वाणी से व्यक्ति तत्व के अनेक गूढ़ रहस्यों का ज्ञान कर सकता है । सन्त अगर ज्ञानी है तो निश्चित रुप से हमारे सौभाग्य खिल जाता है । जिसने कभी सन्त के दर्शन नही किये यदा कदा किसी ना किसी निमित से उसे ये लाभ मिल जाता है और उसका भाग्य भी संवर जाता है ।
*अनेक परीषहों को जीतने के बाद होता है चातुर्मास*
जैन धर्म के सभी मुनि मण्डल अपने शिष्य मण्डल के साथ कोई 1000 तो कोई 2000 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर निर्धारित चातुर्मास स्थान तक पहुँचते है । यहाँ तक कि यात्रा करते करते वे ग्रीष्म ऋतु की ग्रीष्म ऊष्मा को भी सहन करते है तो वही शीत ऋतु की शीत लहर को भी समत्वता से सहन करते हैं । समाज का नेतृत्व करने में हमेशा साधु समाज ही सक्षम रहा है ऐसे वर्तमान के बुरे वातावरण में अगर सन्त समाज समाज को मार्गदर्शन नही देंगे तो समाज का भविष्य हानिकारक हो सकता है ।
गुटखे के पैकेट सिगरेट के पैकेट पर जानलेवा सन्देश लिखा होता है फिर भी हम उसका सेवन करते है अगर वही सन्त महात्माओं ने हमें प्रेरित कर दिया तो हम तत्काल त्याग करने में सक्षम हो जाते है । चंचल मन को स्थिर केवल पंच महाव्रत धारी ही कर सकते हैं ।
*जैसे पार्टी में सबको ले जाते हो वैसे ही धर्म स्थान में सबको ले जाओ*
आज की युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन देने के लिए सन्त महात्माओं के पास अवश्य ले जाये अगर परमात्मा की वाणी का एक भी अंश जीवन में उतर गया तो हमारा कल्याण निश्चित है । जैसे हम पिक्चर देखने , पार्टी करने , घूमने , आदि संसार की क्रियाओं को सम्पन्न करने के लिए रिश्तेदार पडौसी दोस्त आदि को जबर्दस्ती ले जाते है उसी तरह आपने स्वयं के कल्याण के लिए दूसरों के कल्याण के लिए जबर्दस्ती ही सही पर धर्म गुरुओं की शरण में ले जाये ।
ये वर्षावास जगत के सभी जीवों को अपने लक्ष्य की प्राप्ति का निमित्त बने और साथ ही ज्ञान दर्शन चारित्र में सबका मन रमण करे ऐसी हार्दिक मंगल कामना के साथ चातुर्मास की हार्दिक शुभकामनाएं ।
चातुर्मास धर्म का उगता हुआ सूरज है ।
चातुर्मास तप त्याग का स्वर्ण अवसर है ।।
पवित्र होने के लिए लोग तीर्थयात्रा करते हैं ,
परन्तु चातुर्मास घर पर आई हुई धर्मगंगा है ।।
*गुरु अमृत शिष्य*
*डॉ वरुण मुनि*
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