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आखिर सीवरेज के बेतरतीब कार्यों पर चुप्प क्यो है निकाय के जनप्रतिनिधि...!

जैतारण/आईबीखांन।
देखिए क्या कयामत आई है कि जैतारण नगरपालिका परिक्षेत्र मे इन दिनों सीवरेज ठेकेदार के व्दारा किये जा रहे सीवरेज के गौरवशाली कार्यो की गुणवत्ता जांचने के लिए न तो पालिका के हुक्मरानो को फुर्सत है और न ही शहरी निकाय के मुख्याजी को यह देखने के लिए समय मिल रहा है।इस सीवरेज का भविष्य क्या होगा, यह अपन अच्छी तरह जानते है...!सीवरेज के बेतरीन कार्यों से भले तीन की तिकड़ी खुश है,लेकिन कटू सत्य यह है की शहर की आमो अवाम इनके कार्यो से तनिक भी खुश नहीं है।लेकिन मुझे हैरत हो रही है की शहर का प्रतिनिधित्व करने वाले वे जनप्रतिनिधि आखिर इस मामले मे चुप क्यों है।तो क्या जैतारण की जनता ने आपको चुप रहने के लिए ही चुना है,जो आप इस विषय में अपना इकबाल बुलंद करने से कतराते हो।जहां तक अपना अनुभव है उसके लिहाज से शहरी निकाय के कुछ मामलों मे जनप्रतिनिधियों को पक्ष एवं विपक्ष मे बोलना होता है,लेकिन सीवरेज का मामला पक्ष-विपक्ष का नहीं बल्कि शहरी विकास से जुड़ा हुआ है और विकास के मामलों मे इनकी चुप्पी साधना तो लाजमी है,लेकिन नियमों के विपरित होने वाले मामलों मे शहरी निकाय के जनप्रतिनिधियों यू चुप्पी साधकर बैठना इस अनाडीकलमकार को अभी समझ मे नहीं आ रहा है।सनद रहे की अपनी शहरी निकाय मे मुख्याजी सहित कुल 20 निर्वाचित सदस्य है और दो सरकार व्दारा उपकृत सदस्य है,जहां मुख्याजी का न बोलने के पीछे कई कारण हो सकते है जिसके बारे मे टिका टिप्पणी करना लाजमी भी नहीं है।मगर शेष 21सदस्य इस घोर अनियमितता वाले सीवरेज के कार्यों मे आखिर क्यों नहीं बोल रहे है यह अपने लिए उत्सुकता का विषय है।हालांकि इस विषय को लेकर अभी कुछ ही देर पहले निकाय के नेताप्रतिपक्ष श्री सुनील राठौड़ से अपनी बात भी हुई जहां राठौड़ ने बताया की वे सीवरेज के मामले मे अनेकों बार निकाय के हुक्मरानो एवं ठेकेदार से इस विषय मे लगातार अपनी बात रखते आ रहे है।जबकि एक माननीय सदस्य ने तो इस पर अपनी जो टिप्पणी भेजी वो हमें लाजवाब लगी,आप भी मुलायजा फरमाए...! *"खांन साहब जैतारण की किस्मत खराब है,किसे दोष दे,क्योंकि कांटे भी हमने बिखरे है,अब चुभते है।क्या करें,गलती हमनें की उसे भुगत रहे है।किसे दोष दे...!यह एक कडवी सच्चाई है जिसे हम स्वीकार करते है।"* कुछ ऐसी ही टिप्पणी एक सदस्य ने अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया *खांन साहब यहां जो ज्यादा बोलते है उन सदस्यों का निकाय मे काम नहीं होता है,जनहित के मामले पर बोलने पर भी उनके कामों मे उलझने मे उलझा दिया जाता है,यहां हर सदस्यों की यही पीड़ा है*माननीय सदस्यो की इन चंद लाईनो मे बहुत कुछ दर्द छिपा है,जिसे भले ही कोई समझ नहीं पाये, यह दिगर बात है,लेकिन यह अनाडीकलमकार इनकी भावनाओं को भली भांति समझ रहा है।मेरी बात उन सम्मानीय जनप्रतिनिधियों को भले ही बुरी लगेगी, लेकिन एक कलमकार होने की वजह से मे उनसे सवाल करने की गुस्ताखी कर रहा हूं।क्या आपको शहर की जनता ने चुप रहने के लिए चुना या जनहित मे बोलने के लिए चुना..?आपका न बोलने का क्या यह मतलब नहीं की निकाय मे आपकी कोई सुनता नहीं या फिर आप भी आप बोलने की हिमाकत नहीं कर पा रहे हो...?चुकि मे तो अनाडी हू लेकिन आप सभी उम्दा खिलाड़ी है...आप यदि एकमत हो जाय तो कसम खुदा की आप मे वो ताकत है की आप हुकूमत को हिला सकते हो...!पर अफसोस की आप भी सीवरेज के मामले मे चुप्पी साधकर बैठे हो...!जनता ने आपको पर जो भरोसा किया उस पर खरा उतरने का प्रयास करो,आपके नहीं बोलने से ही तो तीन तिकड़ी के हौंसले बुलंद है,वरना आप बोलते तो अपने शहर की यह दशा नहीं होती...9413063300

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