पाली कलेक्टर मे फिर दिखा देवदूत का रूप...।
पाली कलेक्टर में एक बार फिर दिखा देवदूत का रूप ,दो अनाथ बच्चियो को गोद लेकर इंजिनियर बनाने की इच्छा जताई
पिंटू अग्रवाल ✍कलम
पाली सिरोही ऑनलाइन
देश विदेश में राजस्थान की अलग पहचान है और यहाँ की कहावथ भी महसूर है मारवाड़ की जितनी भी कहावथ बनी सच्चाई पर आधारित है। एक कहावथ आज मुझे याद आई जिला कलेक्टर पाली के द्वारा किये जा रहे कार्यो को लेकर जो समर्पित है जिला कलेक्टर पाली को.........
*जननी जने तो एरो जने के दाता के सुर नहितो रहिजे बाजनी मत गवाइजे नूर*
पाली। जिले के मारवाड़ जंक्शन ंपंचायत समिति के भगवानपुरा गांव में रहने वाली 6 साल की पूजा एवं 9 साल की संतो के लिए पाली जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम एक बार फिर देवदूत बनकर आए। यह एक संयोग कहे या बच्चियो की किस्मत पर पाली कलेक्टर ने इन दोनों बच्चियों की दयनीय स्थिति को देखकर खुद कलेक्टर विचारणीय स्थिति में आ गए और बच्चियो को गोद लेने की ईच्छा जताई तथा दोनों को पढ़ा लिखाकर इंजीनियर बनाने की भी बात कही तो उपस्थित ग्रामीण भी भावुक हो गए।
इस पल बच्चियो को देख कलेक्टर के मन में किया चला होगा ............यह नहीं बता सकता पर बच्चियो के जिंदगी का सुखद पल जरूर होगा की फरिस्ते जिन्दा है।
वहीं पास में बैठी बच्चियों की 66 र्वाय दादी जनता की आंखें खुशी से भर आई तथा ग्रामीण भी कलेक्टर के इस जज्बे को सलाम करते नजर आए तथा काफी देर तक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अभिनन्दन भी किया।
यह कहानी नहीं यह वाख्या है मारवाड़ जंक्शन पंचायत समिति के बिठूड़ा कलां गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को जिला कलेक्टर श्री कुमार पाल गौतम की अध्यक्षता में रात्रि चौपाल का आयोजन किया जा रहा था। चौपाल के दौरान बिठूड़ा कलां ग्राम पंचायत के भगवानपुरा राजस्व गांव की 66 र्वाय जनता देवी पत्नि स्व. श्री भीकनाथ अपने अपने दो पौत्र एवं दो पौत्रियों को लेकर खड़ी हुई और मंच तक जा पहुंची और कलेक्टर को अपनी पीड़ा बताई। बेवा महिला की स्थिति को देखकर कलेक्टर स्वयं भावुक हो गए तथा कलेक्टर ने उसकी हर समस्या के समाधान के लिए आश्वस्त किया। जनता देवी के साथ आई दो पौत्री जिनमें से एक संतो 9 र्वा जो तीसरी कक्षा में पढ़ती है तथा दूसरी छह र्वाय पौत्री पूजा जो कक्षा 2 में पढ़ती है, को देखकर कलेक्टर कुमारपाल गौतम से भी रहा नहीं गया। उन्होंने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एस. शेखावत से चर्चा कर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत पाली जिले में संचालित की जा रही आपणी बेटी योजना के तहत इन दोनों बच्चियों को ग्रामीणों के समक्ष गोद लेकर पढ़ा लिखाकर इंजीनियर बनाने की बात कही। ये बात सुनकर ग्रामीण स्वयं आश्चर्यचकित हो गए और पास खड़ी इन बच्चियों की दादी की भी आंखों में आंसू आ गए।
जिला कलेक्टर ने इन दोनों बच्चियों को बुधवार को पाली में अपने कक्ष में बुलाकर बैठाया तथा इन्हें नए कपड़े, जूते, बस्ता एवं समस्त प्रकार की शिक्षण सामग्री आदि दिलाकर पाली से पहनाकर अपने गांव भगवानपुरा गांव विशेष वाहन से भिजवाया । गांव में इन दोनों बच्चियों को नए परिधान में देख कर गांव के सभी लोग जिला कलेक्टर श्री कुमारपाल गौतम की प्रशंषा करते हुए नजर आए। इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी सौरभ स्वामी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एस. शेखावत, आपणी बेटी योजना के समन्वयक के.सी. सैनी, भगवानपुरा गांव के सरपंच मीठाराम वैणव, ग्रुप सचिव कैलाश मीणा, रोजगार सहायक कानाराम, महिला एवं बाल विकास विभाग की साथिन श्रीमती इन्द्रा वैणव, ए.एन.एम. रेखा कुमारी, जिला कलक्टर के निजी सचिव ईश्वरचंद पारीक, आईईसी समन्वयक नन्दलाल शर्मा एवं कलैक्टरेट के कई अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
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कलेक्टर उनके लिए भगवान से कम नहींः जनता देवी
इन बच्चियों की दादी जनता देवी ने बताया कि राम रूठ जाता है तो क्या राज पर तो पूरा भरोसा है। उनके लिए राम रूठ गया तो क्या राज यानि जिला कलेक्टर आज उसके लिए किसी भगवान से कम नहीं है। जिला कलेक्टर ने दोनों पोतियों को गोद लेकर जो बीड़ा उठाया है, उससे मेरा आत्म विश्वास बढ़ा है और बच्चियों का लालन-पालन और अच्छी तरह से कर सकूंगी। वह बताती है कुछ उसके बेटे जेठनाथ की शादी सोजत निवासी कमला के साथ हुई थी तथा बाद में उसके बेटे की हत्या हो गई । उसके बाद जेठनाथ की पत्नि कमला ने भी अपने दो बेटे मांगीलाल, भूराराम, पुत्री संतो व पूजा को छोड़कर अन्य स्थान पर ादी कर दी। इतना ही डेढ़ र्वा पहले ही इनकी झोपड़ी में आग लगने से झौपड़ी जलकर राख हो गई थी, तब से वे खुले आसमान के नीचे ही जीवन यापन कर रहे है। ऐसे में थोड़ी मदद भी उनके लिये बहुत बड़ा सहारा है। वे कहती हैं कि उनकी पोतियों के लिये अब उसे चिंता नहीं है क्योंकि कलक्टर साहब ने उन दो बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी ले ली है।
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गांव वाले भी नहीं पहचान पाए पूजा और संतोष को-
पाली कलेक्टर कुमार पाल ने इन दोनों बच्चियों नए कपड़े, बस्ते दिलाकर वापस पाली से भगवानपुरा अपने गांव भेजा गया तो वहां पहुंचने पर लोगों ने इन दोनों बच्चियों को पहचान ही नहीं पाए तथा दादी की आंखों में आंसू छलक रहे थे। इस दौरान सरपंच, ग्राम सेवक,रोजगार सहायक एवं एएनएम ने जब जिला कलेक्टर के अपनत्व के बारे में ग्रामीणों को बताया तो ग्रामीणों में भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
जिले की पांच सौ बेटियां इसी माह और गोद ली जायेंगीः-सी.एम.एच.ओ.,पाली
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एस. शेखावत ने बताया कि जिला कलक्टर द्वारा दिये गये निर्देशानुसार इसी माह के अंत तक पाली जिले की लगभग 500 बेटियों को और गोद लिया जायेगा तथा उनकी शिक्षा दीक्षा सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने बताया कि जिले के समस्त जिला स्तरीय एवं उप जिला स्तरीय समस्त सरकारी कार्यालयों को एक एक बेटी गोद दी जायेगी। इसी प्रकार जिला इन्जीनीयर्स फोरम को 25 बेटियां गोद दी जायेंगी तथा जिले की समस्त सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों को भी एक एक बेटी गोद दी जायेगी,इस प्रकार इस माह में ही लगभग 500 बेटियां गोद दी जायेंगी,इस हेतु बेटियों के चयन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। एन.एच.ए.आई. द्वारा संचालित किये जा रहे पाली जिले के सभी टोल बूथों को भी एक एक बेटी गोद दी जायेगी।
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