क्या सरकार सुनेगी किसानों की पुखार...!
आईबीखान की कलम से...
कभी सूखे की मार तो कभी ओलावृष्टि तो कभी अतिवृष्टि की मार झेलने वाले देश के अन्नदाता पर हर बार प्राकृतिक प्रकोप का दँश झेल कर अपने परिवार का लालन पालन करने वाले किसानों की हालत इन दिनों पतली होने लगी है।कठिन परिश्रम करने के बावजूद किसानों की दशा नहीं सुधर पा रही है।शनिवार एवं रविवार दोपहर मे जैतारण क्षेत्र मे तेज हवाओं के साथ हुई बेमौसमी बरसात ने किसानों के अरमानो पर पलभर मे ही पानी फेर दिया।
इस बेमौसमी बरसात के कारण अकेले जैतारण क्षेत्र के विभिन्न गावों के किसानों को लाखों का नुकसान हो गया।किसानों की इस बर्बादी पर आने वाले दिनों मे जैतारण क्षेत्र के कई नेता किसानों की आड मे अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने उनके दर पर जाएगे।मगर क्या किसानों को उनके हुए नुकसान की भरपाई वे कर पाएंगे, शायद नहीं।जैतारण क्षेत्र मे आज हुई इस बरसात से हुए नुकसान की जो तस्वीरे मेरे पास आई है उसे देखकर यह लगा की इस क्षेत्र मे बरसात ने कई किसानों को तबाह कर दिया है।कुछ दिन पहले जो किसान हजारों रूपये लगाकर अपनी फसलों की कटाई कर अच्छी फसल होने की उम्मीद मे उत्साहित थे वे किसान आज अपनी फसलों की बर्बादी को देखकर आँसू बहा रहे है।आखिर किसान अपनी यह पीडा बयां करें तो भी किसे करें, क्योंकि इनकी किस्मत ही कुछ ऐसी है।चलते चलते मेरा अनुरोध है राज्य सरकार एवं उनसे जुडे जनप्रतिनिधियों से की वे किसानों की अपनी पीडा समझ कर पीडित किसानों के लिए कोई विशेष पैकेज जारी करवाकर इनके बहते आँसूओ को पौछने की पहल करें...।
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