जल संरक्षण में सभी की भागीदारी जरूरीः गोयल
पाली...।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के द्वितीय चरण का आगाज पाली जिले में शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों, भामाशाहों, धर्म गुरूओं सहित ग्रामीणों की उपस्थिति में समारोहपूर्वक शुरू हुआ। इस दौरान जगह-जगह हवन कर अतिथियों ने यज्ञ में आहुतियां देकर कार्यक्रम को विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम के शुभारंभ में गांवों में मेले जैसे माहोल नजर आया तथा लोगों ने बढ़ चढ़कर श्रमदान कर सहयोग किया।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के द्वितीय चरण का जिला स्तरीय समारोह सुमेरपुर पंचायत समिति के कोलीवाड़ा गांव में हुआ। कार्यक्रम के शुरूआत में पंचायत राज मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने यज्ञ कर हवन में मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां दी। इस मौके पर पंचायत राज मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलबन अभियान के तहत गांवों को जल के मामले में आत्म निर्भर बनाना है। इसमें हम सब की भागीदारी जरूरी है। इसी को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान में 9 दिसंबर 2016 से राज्य के 42 सौ गांवों में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के द्वितीय चरण की शुरूआत की है। इस द्वितीय चरण में 1.35 लाख जल संरक्षण के कार्य करवाए जाएंगे। साथ ही इस बार पहली बार राज्य के 66 शहरों में भी यह अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाली जिले में द्वितीय चरण के तहत 53 ग्राम पंचायतों के 102 राजस्व गांवों तथा दो नगरीय निकायों में यह कार्य शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है। फिर भी इस योजना में आमजन की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गांव को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। ताकि आने वाले समय में ग्रामीणों को पेयजल की समय से नहीं जुंझना पड़े। गोयल ने कहा कि यह अभियान एक सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि इस अभियान में आमजन की भागीदारी जरूरी है। चाहे दानदाता हो, उद्योगपति हो या धर्मगुरू सभी का सहयोग जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाएं। अध्यक्षता कर रहे उप मुख्य सचेतक मदन राठौड़ ने कहा कि सरकार की कोई भी योजना तभी सफल होती है, जब उसमें समाज व आमजन की भागीदारी हो। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान भी इनमें एक है। इस अभियान में भी आमजन की भागीदारी किसी न किसी रूप में जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के बाद इस गांव में पेयजल की कमी नहीं रहेगी। जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम ने कहा कि जल संरक्षण आज की जरूरत है। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत कोलीवाड़ा गांव में होने वाला कार्य जिला ही नहीं पूरे राज्य में मिशाल बनकर उभरेगा। समारोह को सुमेरपुर प्रधान राजेन्द्रसिंह देवड़ा, उप प्रधान करणसिंह नेतरा, शनिधाम ट्रस्ट की निदेशिका मॉ श्रृद्धा, जिला परिषद के सीईओ वीरेन्द्र वर्मा, ने भी संबोधित किया। इस मौके पर प्रशिक्षु आईएएस सौरभ स्वामी, सुमेरपुर उपखंड अधिकारी महिपाल भारद्वाज, एएसपी अताउर्रहमान, विकास अधिकारी दशरथसिंह, सरपंच सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, भामाशाहों, धर्म गुरू व गामीण उपस्थित थे। समारोह में अतिथियों द्वारा भामाशाहों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के शुरूआत में पंचायत राज मंत्री सुरेन्द्र गोयल एवं जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम ने समारोह स्थल पर यज्ञ कर हवन में मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां दी। इस दौरान अतिथियों ने गांवाई तालाब में श्रमदान किया तथा पौधारोपण भी किया। इसके बाद पंचायत राज मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत शहरी क्षेत्र में चयनित सुमेरपुर नगर पालिका क्षेत्र में भी श्रमदान कर इस अभियान की विधिवत शुरूआत की।
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अभियान में एक दिन में किया 25 लाख एकत्रित
पाली। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान एक सरकारी अभियान नहीं बल्कि इसमें आमजन की भागीदारी जरूरी है। इसी परिकल्पना को कोलीवाड़ा गांव के ग्रामीणों ने कर दिखाया। यहां के भामाशाहों ने इस अभियान में ऐसी भागीदारी निभाई कि एक ही दिन में भामाशाहों ने 25 लाख रूपए की राशि सहयोग के रूप में एकत्रित कर दी। हुआं यूं कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के द्वितीय चरण का आगाज शुक्रवार को सुमेरपुर पंचायत समिति के कोलीवाड़ा गांव में जिला स्तरीय समारोह रखा गया। जिसमें इस गांव में अभियान के तहत कई कार्यक्रम करवाए जाने थे, इसको लेकर सुमेरपुर पंचायत समिति के प्रधान एवं कोलीवाड़ा निवासी राजेन्द्रसिंह कोलीवाड़ा ने अपनी तरफ से स्वयं ने 7 लाख एक हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की। इसके बाद तो गांव में भामाशाहों की कतार लग गई और एक-एक करके करीब 25 लाख रूपए की राशि एकत्रित हो गई। जो अपने आप में मिशाल बन गई। एक दिन में इतनी राशि एकत्रित होते देख स्वयं पंचायत राज मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने भी मंच से कहा कि कोलीवाड़ा के भामाशाहों ने जो यह मिशाल पेश की है वे राज्य में अनूठी है। यह दूसरे गांवों के लिए उदाहरण बन कर रहेगी।
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