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अधिकारी से इतने खफा क्यों है जनप्रतिनिधि...!

खरी-खोटी..✍��आईबीखान
प्रदेश की चर्चित नगरपालिका मे शुमार जैतारण नगर पालिका के सत्तापक्ष एवं विपक्ष के जनप्रतिनिधि इन दिनों पालिका के अधिशाषी अधिकारी से खफा होकर उनके खिलाफ बगावती तेवर अपनाने लगे है।यह पहला मौका है जब सतापक्ष एवं विपक्ष एकसाथ खफा होकर अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे है,अलबत्ता किसी अधिकारी के साथ एक पक्ष तो साथ रहता ही है मगर जैतारण मे तो अब अपनो ने भी उनका साथ छोड़ दिया है।
गत 18 जनवरी को नगर पालिका की आहूत साधारण सभा की बैठक कार्यवाही का जिस रूप से इन जनप्रतिनिधियों ने अधिशाषी अधिकारी की कार्यशैली से नाराज होकर उस बैठक का बहिष्कार किया, उसे देखकर तो यह लगता है कि जनप्रतिनिधि अधिकारी जी की कार्य शैली से खुश नहीं है।जनप्रतिनिधियों के उस बैठक का बहिष्कार करने से भले ही अधिकारी जी के कोई फर्क नहीं पडा होगा, मगर बैठक नहीं होने का खामियाजा वाल्मीकि समाज के लोगों पर पडा जिनके की सफाई कर्मचारी के रूप मे भर्ती करने का प्रस्ताव लिया जाना था,मगर बैठक मे जो कुछ भी हुआ इसका सीधा असर उन लोगों पर ही पडा जो पिछले तीन सालों से सफाई कर्मी की भर्ती का इँतजार मे बैठे है।
वाल्मीकि समाज भी अब फिर आन्दोलन की राह इख्तियार पर है।अधिकारी जी से जनप्रतिनिधि खफा क्यों है,इसका निर्णय तो भले ही जलदाय मँत्री एवं जैतारण विधायक सुरेन्द्र गोयल के सामने ही होगा, लेकिन मेरी जिन जिन जनप्रतिनिधियों से बात हुई जहां उन्होंने बताया की वे अपने स्वाभिमान के खातिर खफा है।हालांकि मैंने पिछले दिनों इस सम्बंध मे ई.ओ.जैतारण से भी बात की जहां उनका तर्क कुछ अलग ही था...!जो भी हो सत्तापक्ष एवं विपक्षी  जनप्रतिनिधियों के एक साथ अधिकारी जी से खफा होकर बैठक का बहिष्कार कर देना, इसे मामूली बात नहीं समझनी चाहिए।जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारी जी के बीच सुलह करवाने की पहल करने वालों को अधिकारी जी की कम जनप्रतिनिधियों की बातों को गँभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि जनप्रतिनिधियो का जुडाव सीधे जनता से जुडा हुआ है...9413063300
*फाईल फोटो*

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