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इसे तो पालिका बोर्ड की किरकिर ही हुई है


-आईबीखांन की कलम से
जैतारण नगरपालिका की गत दिनो आयोजित वार्षिक बजट की बैठक में पालिका बोर्ड के सदस्यो के द्वारा जिस प्रकार हंगामा खडा किया उसका वीडियो मेरे सोशियल गु्रपो में वायरल होने के बाद प्रदेशभर में यह वीडिया इन दिनो खास चर्चा का विषय बना हुआ है।लोकतंत्र में अपनी बात रखने का सभी जनप्रतिनिधियो को अधिकार है,लेकिन जैतारण नगरपालिका की उस बैठक में जिस प्रकार पालिका बोर्ड के पार्षदो ने हंगाम खडा किया गया,उस वीडियो को देखने के बाद मुझे नही लगता की लोकतंत्र के जानकार लोगो को यह उचित लगा होगा। प्रदेशभर के विभिन्न सोशियल मीडिया गु्रपो एवं विभिन्न जनप्रतिनिधियो एवं अधिकारीयो को जो प्रतिक्रियाएं मुझे मिली है,उसे बयां करना लाजमी नही है। कई पाठको ने तो यहां तक लिखा की पालिकाध्यक्ष की टेबल पर खडा होकर हंगामा करना यह पालिका बोर्ड की तौहिन मानी जानी चाहिये। दरअसल हंगामे की शुरूआत पालिकाध्यक्षा के द्वारा बजट पर चर्चा शुरू होने से पहले बैठक से उठकर चले जाने के कारण ही हुआ था। मझेदार बात तो यह है कि कांग्रेस के इस बोर्ड में हंगामा कांग्रेस के पार्षदो के द्वारा ही किया जाना उस वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा है जबकि हंगामा तो पालिका के मुख्य विपक्षी दल भाजपा को करना था,लेकिन उस बैठक में जो हंगामा हुआ उससे तो पालिका बोर्ड की किरकिर ही हुई है। लोकतंत्र में विरोध प्रकट करने के इसके अलावा और भी तरीके है लेकिन आवेश में आकर पालिकाध्यक्षा की टेबल पर चढकर खुलेआम हंगामा करना उचित नही है। गनीमत यह रही की यह टेबल पालिका के अधिशाषी अधिकारी की कक्ष की नही थी,अलबता हंगामा करने वालो के लिए यह भारी पड सकती थी। हालांकि कुछ हद तक इसके लिए पालिका प्रशासन भी जिम्मेदार कम नही है,क्योकि गत बैठको का यह मेरा अनुभव रहा कि स्वयं पालिका प्रशासन पर भी यहां के जनप्रनिधि विभिन्न कार्यो में भेदभाव करने का आरोप लगाते आये है। हो सकता है जनप्रतिनिधियो ने पालिका प्रशासन के खिलाफ अपनी भडास निकालने के लिए यह हंगाम करके यह भूल गये की यह साधारण सभा की बैठक थी न की कोई अन्य स्थल। बहरहाल पालिका बोर्ड की बैठक में जो कुछ भी हुआ उसे देखकर भविष्य में ऐसा नही करने का संकल्प लेना चाहिये। 9413063300

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