बेसाखी के सहारे है यहां सफाई व्यवस्था
आईबीखान की कलम से
Jaitaran-ib khan
प्रदेशभर मे अपनी पहचान बना चुके जलदाय मँत्री सुरेन्द्र गोयल का गृह शहर जैतारण की सफाई व्यवस्था नगरपालिका मे नये सफाई कर्मचारियों की भर्ती नहीं होने के कारण पिछले लम्बे समय से बेसाखीयो के सहारे चल रही है।नगरपालिका की स्थापना हुए लगभग 35 वर्ष से अधिक समय हो गया, लेकिन बीते इन 35 वर्षों मे पालिका ने एक भी सफाई कर्मचारी को नई नियुक्ति नहीं दी गई, अलबत्ता 35 साल पहले जैतारण की जनसंख्या के आकडो के तहत जिनको नियुक्ति दी गई थी उनमें से अधिकतर कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गये, यही नहीं बीते 35 वर्षों मे जैतारण की आबादी मे भी विस्तार हुआ है,मगर यहां आबादी तो बढती गई और सफाई कर्मचारी घटते गये।मौजूदा स्थिति यह है की जैतारण मे सफाई व्यवस्था का बुरा हाल हो रखा है।जैतारण शहर के भीतरी भागों एवं प्रमुख चौराहों की स्थिति देखकर यह नहीं लगता की जैतारण शहर माननीय मँत्रीजी का गृह शहर है।हालांकि राज्य सरकार ने तीन साल पहले जैतारण नगरपालिका मे नये सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए आदेश भी जारी किये मगर दुर्भाग्य से आज दिन तक जैतारण नगरपालिका नये सफाई कर्मियों की भर्ती नहीं कर पाई,जबकि सैकड़ों वाल्मीकि समाज के लोगों ने इसके लिए आवेदन भी किये, लेकिन पालिका प्रशासन की उदासीनता एवं राजनीतिक कारणों से जैतारण नगर पालिका मे नई सफाई कर्मचारियों की भर्ती अधरझूल लटक रही है।केंद्र एवं राज्य सरकार स्वच्छ भारत मिशन अभियान पर जोर दे रही है मगर जैतारण की सफाई व्यवस्था की स्थिति इस बात को बयां करने के लिए काफी है कि यह अभियान धरातल पर कम बल्कि कागजों मे अधिक सफल हो रहा है।शहर की सडको पर बहता गँदी नालियों का पानी और जगह अवरुद्ध पडे बडे नाले अपनी कहानियां बयां कर रहे है तो जगह जगह हररोज लगने वाले गँदगी एवं कूडे कचरे के ढेर इस बात की खुद ब खुद गवाही दे रहे है की यहां की सफाई व्यवस्था खस्ताहाल हो रही है।ऐसा भी नहीं की पालिका प्रशासन शहर की सफाई नहीं करा रही है,सफाई करवाती है मगर जनप्रतिनिधियों के घरों के इर्द गिर्द और चिन्हित स्थानों की ही सफाई होती है।बहरहाल जैतारण की सफाई व्यवस्था बेशाखियो के सहारे चल रही है जिसे अब सहारा देने की आवश्यकता है...9413063300
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