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गायो के लिए अपना बलिदान दे दिया सैय्यद मिर्जा पीर ने...!


जैतारण(आईबीखान)।
मारवाड़ की पावनधरा मे आजतक कई ऐसे वीर यौध्दा हुए जिन्होने अपनी जान की बगैर परवाह करते हुए गायो को बचाने के लिए किसी को दिये अपने वचन को निभाने के लिए गायो को बचाते हुए अपना बलिदान तक दे दिया।जी हा अपन बात कर रहे है कौमी एकता के प्रतीक हजरत सैय्यद मिर्जाअली पीर बाबा का जिन्होने गायो की रक्षार्थ अपने प्राण चुकाने पड़े।
दरअसल जैतारण का उदभव सदियो पहले भाई चारे की दहलीज पर हुआ था।बताया जाता है कि सालो पहले राजस्व गांव रतनपुरा में धोकलराम गुर्जर का एक बाड़ा बना हुआ था।उनके दो पुत्रिया थी,जिनमें बड़ी पुत्री का नाम जैती और छोटी का नाम खेती था।दोनो पुत्रियां पशुपालन का कार्य करती थी।एक दिन जैती के बाड़े से मारने चोर गाये चुराकर ले गए।
उसी समय सिंध(अब पाकिस्तान में) के पांच शहजादे जो सगे भाई थे।वे पाली के पहलवानो के हाथो युध्द हारकर जंगल मे भटकते हुए जैती गुर्जरी के बाड़े के निकट पहुंचे।जैती ने उन पांचो शहजादो को शरण दी तथा उनकी गाये चुराने की घटना सुनाई।तब पांचो शहजादो ने जैती गुर्जरी को अपनी धर्म बहन बनाकर उनकी गायो की रक्षा की रक्षा करने का वचन देकर उन चोरो को पकड़ने के लिए निकल गये।गायो के पदचिन्हो को देखते-देखते जब पांचो शहजादो को यह गाये गिरी-सुमेल के जंगल में विचरण करते देखा तो उन पांचो भाईयो ने जैती गुर्जरी की गायो को एकत्रित कर जब उनको सुरक्षित रूप से लाया जा रहा था की गिरी गांव के जंगलो मे उनका सामना मारने चोर गिरोह से हुआ जहां पांचो शहजादो एवं चोर गिरोहो के बीच जैती गुर्जरी की गायो को सुरक्षित बचाकर लाने मे भीषण संघर्ष हुआ,नतीजन पांच शहजादो मे से एक भाई इन गायो की रक्षार्थ गिरी गांव के पास भीषण लड़ाई मे शहीद हो गये तो शेष चारो भाई भी गाय चोर गिरोह से सामना करते करते गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जैती गुर्जरी की गायो को अपने दिये वचनो को निभाते हुए पुन:रतनपुरा स्थित बाड़े मे लाते समय मिर्जाअली नामक शहजादा यहां जैतारण एवं फूलमाल के बीच एक नाड़ी के पास घायलवस्था मे शहीद हो गये तो शेष तीन शहजादो मे से भी वर्तमान जैतारण मे इसी हालत मे शहीद हो गये।एक अन्य भाई ने जब जैती गुर्जरी को चोरो व्दारा यहां से चोरी की गई गायो को सुरक्षित रूप से सौपा तो जैती गुर्जरी अपनी गायो को देखकर अत्यन्त खुश हुई,लेकिन जब उसने यह जाना की शेष भाई साथ क्यो नही आये।जब भाई ने बताया की चार भाई इन गायो की रक्षा करते शहीद हो गये।यह सुनकर जैती गुर्जरी ने अपने चारो भाई के लिए खुब विलाफ किया।ऐसा कहा जाता है की जैती गुर्जरी को गायो को उसे सुरक्षित सौपने के बाद पाचवे शहजादे ने भी अपने प्राण त्याग दिये।हिन्दू-मुस्लिम कौमी एकता की उमदा मिशाल कायम करने वाले सिंध के इन शहजादो के रूप मे यू तो जैतारण मे इनकी अलग अलग मजारे आज भी बनी हुई है,लेकिन फूलमाल मार्ग पर बनी हजरत सैय्यद मिर्जा अली पीर बाबा की दरगाह आज जैतारण ही नही बल्कि पूरे प्रदेश मे कौमी एकता एवं सम्प्रदाय सदभाव की मिशाल के रूप मे प्रसिध्द है।इस दरगाह के बारे मे ऐसी मान्यता है की यहां बाबा के दरबार मे सच्चे मन से जो भी व्यक्ति अपनी मुराद लेकर आते है,जहां उनकी मुरादे पुरी होती है।हिन्दू-मुस्लिम कौमी एकता के प्रतीक हजरत सैय्यद मिर्जा अली पीर बाबा की यहां भव्य दरगाह बनी हुई है,जहां हरसाल यहां बाबा की दरगाह पर दरगाह कमेठी की और से उर्स का आयोजन किया जाता है।इस बार भी बाबा का सालाना 30 वा उर्स 13 अप्रैल को यहां दरगाह कमेठी व्दारा आयोजित किया जाएगा,जहां उर्स मे इसबार महफिल ए कव्वाली का आयोजन होगा जहां कव्वाली मे नसीमा परवीन बरेली व इरफान तुफैल के व्दारा कव्वालीयां पेश की जाएगी।दरगाह कमेठी के तत्वाधान मे आयोजित होने वाले इस उर्स मुबारक की सफल तैयारीयां व्यापक स्तर पर की जा रही है...।9413063300

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