यह कैसा अतिक्रमण हटाओ अभियान,कई होली तो कई दीवाली
जैतारण(आईबीखांन)।
जैतारण नगरपालिका प्रशासन ने वर्षो बाद शहर में द्रोपती की चीर के मानिद बढे अवैध अतिक्रमणो पर शिकंजा कसने के लिए इन दिनो चलाये जा रहे शहर मे यह अभियान मात्र ओपचारिकता ही बनता जा रहा है,अव्वल तो यह है कि इस अभियान की गाज उन गरीब लोगो पर ही गिर रही है जो दिनभर ठेले एवं लोरीयो पर अपना छोटा व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहे है जिन्हे बेदखल किया जा रहा है या उन दुकानदारो के टीनशेड जो धूप से बचाने के लिए दुकानो के आगे लगा रखे है को हटाकर पालिका प्रशासन इस अतिक्रमण हटाओ अभियान को सफल बता रही है।जबकि शहर के सुरत ए हाल यह है कि आज भी प्रभावशाली लोगो के पक्के अतिक्रमण मुंह ताने खड़े है,लेकिन उनको हटाने के लिए पालिका अब तक पहल नही कर पा रही है।अस्थाही अतिक्रमण हटाकर वाहवाही लूटने वाली नगर पालिका का अतिक्रमण हटाने का यह अभियान मेरी नजर मे सफल नही है।इस बात का नगरपालिका को भी पता है कि जहां जहां उन्होने अतिक्रमण हटाये है वे अतिक्रमण अस्थाही थे और थोड़े दिन बात लोग पुन:अस्थाही अतिक्रमण कर ही लेगे,आमतौर पर हर अभियान के बाद जैतारण मे ऐसा ही होता आया है,इतिहास भी इसका गवाह है।मुझे एक बात अबतक समझ मे नही आ रही है कि हरबार अतिक्रमण की गाज उन गरीबो पर ही क्यो गिरती है।हालांका अधिशाषी अधिकारी हरीशचंद गहलोत यह स्पष्ट कर चुके है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान मे किसी तरह का भेदभाव नही किया जाएगा,भेदभाव नही किया जाएगा यह बात तो आपकी लाजमी है और हर जिम्मेदार अधिकारी की कोई भी प्रतिक्रिया अमूमन यही होती है,लेकिन मेरा एक छोटा सा सवाल है कि इस अभियान मे अबतक अस्थाही अतिक्रमणो को छोड़कर शहर मे ऐसे कितने स्थाही अतिक्रमण आपने हटाए...! कोई एकाद नजीर तो पेश करो,शायद ही कोई ऐसी नजीर होगी,बहरहाल अतिक्रमण हटाने के नाम पर लाखो रूपये खर्च करने के बाद भी प्रभावशाली अतिक्रमणकारीयो के अतिक्रमण न हटाकर उन गरीबो के अस्थाही अतिक्रमण हटाकर क्या कोई बड़ा तीर मार लिया...!चलते चलते अपन तो यही कहेगे जनाब अपनो पर करम और गेरो पर सितम,यह अच्छी बात नही है।आप एकबार उन प्रभावशालीयो को बेदखल करने की हिम्मत तो करो,हम भी देखते है आखिर उन पर किसका रहमो करम है...।9413063300
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