...यहां मंत्रीजी की मेहरबानी है या विभाग की...!
जैतारण(आईबीखांन)।
मारवाड़ी मे एक चर्चित कहावत है कि नानी के घर विवाह हो और मां परोसने वाली हो तो नानी का दोयता कदापि भूखा नही रहता।यही कहावत इन दिनो सूबे के जलदाय मंत्री सुरेन्द्रगोयल के गृहनगर जैतारण मे चरितार्थ हो रही है जहां न केवल विभाग की बल्ले-बल्ले हो रही है, बल्कि उनके चेहते कार्यकर्ता की मांगे भी इस बहाने पूरी हो रही हो भले ही कार्य नियम विरूध्द क्यो नही हो...!आज अपने वो नजीर पेश कर रहे है जलदाय विभाग ने जैतारण बाईपास से झुझण्ड़ा मार्ग पर मालियान श्मशान के स्थित एक गैर आवासीय काँलोनी तक जलदाय विभाग ने तकरीबन 500 मीटर तक तीन इंच तक की पाईप लाईन बिछाकर न जाने किस पर यह उपकार किया है,यह अपन के समझ के परे है।जबकि जिस स्थान पर यह पाईप लाईन बिछाई गई है वहां मौके पर एक भी आवासीय मकान नही है।मकान तो क्या यहां फिलहाल कोई परिन्दा भी पानी पीने वाला नही है।इस संबध में हमने जब सहायक अभियंता जैतारण से बात की तो उन्होने बताया की यहां लाईन बिछाने के लिए माननीय मंत्रीजी का आदेश था।हमने इस संबध में मंत्रीजी से भी राफ्ता कायम करने का लगातार प्रयास किया लेकिन उनसे बात नही हो पाई।मुझे तो इस बात का ताजूब हो रहा है कि माननीय मंत्रीजी हर कार्य नियमों को ध्यान में रखकर करते है तो फिर यह सुनसान जगह पर लाखो रूपये की पाईप लाईन बिछाने की स्वीकृति कैसे दे दी यह बात अपन को हजम नही हो रही है।जबकि जैतारण शहर मे कई ऐसी बस्तीया आज भी मौजूद है जहां नियमो के मकडझाल मे पानी के लिए तरस रही है वहां पाईप लाईन बिछाने के लिए विभाग के नियम आड़े आते है,लेकिन इस सुनसान जगह पर यह नियम लागू क्यो नही हुए। विभाग को यदि यह उपकार करना ही था तो जैतारण से झुझण्डा के लिए वर्षो पहले एक भूमिगत पाईप लाईन बिछा रखी थी,जिसको दुरस्त करके जिन पर भी उपकार करना था,उस लाईन से भी किया जा सकता था,लेकिन विभाग ने उसे बिना देखे मृत घोषित कर उसके उपर नई पाईप लाईन बिछा दी।मुझे यह तो मालूम नही की यह मेहरबानी मंत्रीजी ने की या फिर जलदाय विभाग,लेकिन चलते चलते एक अनाड़ी कलमकार के रूप मे उपकार करने वालो से आग्रह है कि थोड़ा उपकार झुझण्ड़ा गांव पर भी कर दो,क्योकि यह गांव भी पिछले 14 माह से अपने खर्च पर बूंद बूंद पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझा रहा है,वैसे इस सुनसान जगह पर बिछी इस पाईप लाईन से कुछ ही दूरी पर झुझण्डा गांव आया हुआ है,शायद इस लाइन से उनकी भी प्यास बुझ पाये।वैसे उपकार करने की यह परम्परा गत कांग्रेस शासनकाल से चली आ रही है जहां उस जमाने मे तो मवेशीयो के तबेलो तक सी.सी.सड़के जैतारण मे बनती हमने देखी है...9413063300
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