...यहां भीड़ जुटाना नही,भीड़ जुटनी चाहिए थी
जैतारण(आईबीखांन)।
जैतारण की सियासत मे जब जब भी सत्तापक्ष के नेताओ को अपने राजनेतिक कार्यक्रमो के माध्यम से अपना शक्ति प्रदर्शन करना होता है तो वे अकसर भीड़ जुटाने के लिए या तो सरकारी मशीनरी अथवा जनप्रतिनिधियो को ताकिद करते है...! यह परम्परा में पिछले कई सालो से देखता आ रहा हूं और कल भी राज्य सरकार के जलदाय मंत्री सुरेन्द्र गोयल की अगुवाई मे यहां महश्वरीयो की बगीची मे आयोजित भाजपा के सम्मेलन मे भीड़ जुटाने के लिए यही हुआ,जहां सुना है कि महानरेगा के श्रमिक महिलाओ एवं आगनवाड़ी कार्यकर्ताओ को इसमे एकत्रित कर जो भीड जुटाई गई उससे तो यह साबित होता है की आयोजको को अपने कार्यकर्ताओ पर भीड एकत्रित करने का विश्वास नही या फिर वर्तमान मे भीड़ एकत्रित नही हो पा रही थी।आखिर ऐसी नोबत यहां आई ही क्यो जो इनको यहां बुलाना पड़ा...!माननीय गोयल साहब की छवि दूसरे नेताओ से थोड़े हटकर है,उनकी छवि एवं उनके आचार विचार से मे भली भाँति परिचित हूं।वे न तो गलत कार्यो को सहन करते है और न ही गलत कार्य करने देते है।यहां तक की एक अनाड़ी कलमकार के रूप मे मेरा भी उनसे पुराना रिश्ता रहा है।लेकिन यह दिगर बात है।कल के कार्यक्रम मे जो कुछ देखने को मिला उससे तो यह कयास लगाये जा सकते है कि शायद मंत्रीजी को अब अपने कार्यकर्ताओ पर इतना भरोसा नही रहा की वे इस कार्यक्रम मे इतनी भीड़ जुटा पाएगे।आप राज्य सरकार के बड़े मंत्री है आपके एक इशारे पर अपने इलाके में भीड़ जुटनी चाहिए थी,लेकिन यहां वो भीड़ नही जुटी बल्कि जुटाने के लिए जतन करने पड़े।हालांकि यह खुशर फुसर सियासी गलियारो मे कल शाम को ही शुरू हो गई थी की भाजपा के इस कार्यकर्ताओ एवं जिलास्तरीय कार्यक्रम मे मैनेज करके भीड़ जुटाई गई थी...! यदि वास्तव मे यह बात सत्य है तो यह अच्छे संकेत नही है,इस पर आपको और आपकी टीम को मनन करना चाहिए।चलते चलते एक अनाड़ी कलमकार के रूप मे यही कहूंगा की यहां सत्ता किसी भी कि क्यो नही हो,अमुमन हमने यहा यही देखा की कि यहां केवल दुल्हे बदलते है,मगर आमतौर पर बाराती वही होते है।लेकिन इस परम्परा को अब बदलना होगा...9413063300
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