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व्यग्यबाण...!

आईबीखांन की कलम से...।
अपनी शहरी निकाय के किस्सो को यदि एक एककर संग्रह किया जा तो बेहतरीन संग्रहो का खिताब इसे देने से कोई रोक नही सकता...!पिछले दो दिनो में रूक रूककर हुई मामूली बरसात ने तो शहरी निकाय की बेहतर व्यवस्थाओ की न केवल पोल खोलकर रख दी,बल्कि इस अनाड़ी को भी सकते मे डाल दिया है।सकते मे इसलिए की यह अनाड़ी कलमकार इस निकाय के सर्वाधिक डूब वाले पाँश इलाके मे रहता है जहां शहरी निकाय के रहमो करम से अपन को हर मामूली बरसात झमाझम ही लगती है।लेकिन जहां डूब क्षेत्र का दूर तलक वास्ता नही हो और वहां मामूली बरसात के आने से लोगो को बाढ जैसे हालातो का अहसास हो तो लाजमी है,निकाय की व्यवस्थाओ पर लोग नुक्ताचिन्ही करेगे ही,आप कहेगे यह नुक्ताचिन्ही क्या बीमारी है तो यह बता दू की व्यवस्थाओ पर प्रश्नचिन्ह लगाना...!हालाकि बरसात के इंतेमाजातो की विगत अपन लिख ही चुके है,मगर आज जब अपन शहर के अति स्वच्छ एवं व्यस्तम रियासती इलाका फौजी चौराहा से गौशाला तक अपनी बाईसिकल से इस राह पर चले तो लगा की यहां के हालात तो इस बरसात ने अपने पाँश इलाके से भी बदतर कर रखे है।इस इलाके मे जल निकासी के लिए लाखो रूपये खर्च कर तामीर किये गये नालो मे जल निकासी के ऐसे प्रबंध दिखे की नव तामीर यह नाले खुद बरसाती पानी से लबालब होकर अंतिम सांसे गिन रहे थे।भाटी चौराहा से एक मार्ग अपनी बस्ती वालो की और जाता है तो दूसरा मार्ग जनपथ की तरह गौशाला के लिए निकलता है।मगर इन मार्गो पर जमा पानी को देखकर लगा की इस इलाके मे मानो बरसात नही बल्कि साक्षात मेघराज खुद आये...!सर्वत्र पानी ही पानी,दृश्य वाकई मे नयनोभिराम,एकबार तो इस अनाड़ी का यह मन हो गया की क्यो नही नौका विहार किया जाय...! फिर मन मे ख्याल आया की रोजे की हालत मे नौका विहार करने से अपने बंदन पर नापाकी के छिटे न लग जाय...!वाह भई वाह दाद देनी पड़ेगी शहरी निकाय की व्यवस्थाओ को जिसने जनपथ जैसे मार्गो को गौरवपथ बनाकर रख दिये...9413063300

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