...तो क्या बस्तियों के डूबने के बाद होगी यहां जल निकासी की व्यवस्था...!
जैतारण-पाली...आई.बी.खांन
आमतौर पर हरकोई अच्छी बरसात को लेकर खुश होते है लेकिन जैतारण की कई बस्तीयो के लोग मामूली बरसात से ही परेशान हो जाते है, वे चाहते है कि बरसात केवल खेतो में ही हो,यह दिगर बात है की अब आमजन सुखद बरसात की राह देख रहे है जहां गनीमत समझो की अभी तलक वो बरसात नहीं हुई जो 5 जुलाई 2007मे हुई थी...!पढने मे भले ही इस अनाडीकलमकार की यह बात अटपटी सी लग रही होगी, लेकिन यह सत्य है कि जैतारण शहर की अनेक बस्तीयो के बासिन्दे मूसलाधार बरसात को लेकर हमेशा ही भयभीत होते है। दरअसल अपनी जैतारण शहरी निकाय के द्वारा शहर में वर्षो से बरसाती पानी के भराव की समस्या का स्थाही समाधान अब तलक न किये जाने के कारण यहां बरसात के दिनो में कई लोगो को भारी परेशानीयो का सामना करना पडता है। नगरपालिका के द्वारा हरबार बरसात से पहले शहर के गंदे पानी के नालो की व्यापक साफ सफाई तो करवाता है, लेकिन बरसाती पानी की उचित निकासी की व्यवस्था के लिए कोई ठोस उपाय नही किये जाने के कारण जैतारण की कई बस्तीयो में मामूली बरसात में मानो बाढ जैसे हालात हो जाते है,शहर की कच्ची बस्तीयो में शुमार नयापुरा बस्ती,बंजारा काॅलोनी,कजावा बस्ती के अलावा,खातीनाडा इलाका,अजीम काॅलोनी,तालकिया रोड,मेडता चौराहा सहित आधा दर्जन ऐसे क्षेत्र है जहां बरसात के दिनो में आम अवाम को भारी परेशानीयो से रूबरू होना पडता है। पिछले कुछ सालो से बरसाती पानी की निकासी के प्रमुख मार्गो को प्रभावशाली लोगो के द्वारा बरसाती पानी का रूख मोड दिये जाने के बाद तो हालत और बिगडने लगे है। मेडता मार्ग इन दिनो इस बात की गवाही देने के लिए काफी है जहां बिन बरसात के बाद भी इन दिनों जलभराव तालाब का रूप धारण किये यह चौराहा चीख-चीख अपनी बदहजमी की कहानी बयां कर रहा है,जैसा की कल अपने नियमित ब्लॉग मे भी अपन लिख चुके है यहां बिन बरसात पानी एकत्रित हो रखा है।बरसात के दिनों मैं तो कई बार जैतारण-मेडता मार्ग तक अवरूद्व हो जाता है। शहर की अजीम काॅलोनी,कजावा बस्ती,तालकिया मार्ग आदि ऐसे चिन्हित क्षेत्र है जहां हर बार बरसात के दिनो में लोगो को भारी परेशानीयो का सामना करना पडता है लेकिन नगरपालिका प्रशासन इन क्षेत्रो में पानी की निकासी के इंतजाम आज दिन तक नही कर पाया है। यहां यदि भारी बरसात हो जाती है तो लोगो को अपने घरो से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। आखिर सवाल यह है कि जैतारण जैसे शहर में जहां के मौजूदा विधायक राज्य सरकार में काबिना मंत्री है तो इससे पहले वाले विधायक कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव रह चुके है लेकिन इन्होने ने भी बरसाती पानी के निकासी के लिए कोई ठोस उपाय नही कर पाये।चलते-चलते अपन तो यही कहेंगे कि क्या शहरी निकाय इन क्षेत्रों के बरसाती पानी मे डूबने के बाद निकासी की व्यवस्था करेगा क्या...? नोट:- यह फाइल फोटो है-9413063300
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