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आखिर इस दलदली तालाब से कब मिलेगी मुक्ति...!

जैतारण/आईबीखांन।
अपनी जैतारण शहरी निकाय की अंधेरगर्दी का आलम कहा जाय या फिर लापरवाही की बेतरीन मिशाल,क्योंकि शहर की मुख्य सडके इन दिनो बीन बरसात ही लबालब होकर राहगीरों की राहों को न केवल रोक रही है,अलबत्ता उनको दुर्घटनाओ की खुली दावतें दे रही है,मगर शहरी निकाय के हुक्मरान शहर की इन तालाब का रूप इख्तियार करने वाली सडक और चौराहा की दशा सुधारना तो दूर मगर इनको न देखने के लिए अपनी आंखों पर महाभारत की गंधारी की तरह मुझे लगता है।पटटी बांधकर अभी तक कुंभकर्णी नींद ले रहे है।जी हां अपन बात कर रहे है शहर के अतिव्यस्त चौराहे मे शुमार मेडता-जोधपुर चौराहा की जहां इन दिनो बिन बरसात के यह चौराहा गंदे पानी से लबरेज होकर पिछले कई दिनो से न केवल वाहन चालकों की बल्कि राहगीरों की राहों मे रोड़ा बनकर शहरी निकाय के उम्दा कार्यों की नजीरे पेश करते हुए इस शहर को प्रवासी यात्रियों की नजरों मे शर्मसार कर रहा है।इस अनाडीकलमकार को पिछले एक पखवाड़े से दर्जनों लोगों के ताने केवल इस लिए सुनने पड़े की अपन कुछ दिनो से निढले होकर चुपचाप मेड़ता चौराहे का नयनाभिराम दृश्य देखकर इस उम्मीद मे जीने लगे की माननीय जलदाय मंत्री के शहर की यह शहरी निकाय आज नहीं तो कल इसकी दशा सुधारने की पहल कर लेगी, मगर इसे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता की पालिका के हुक्मरानो ने दलदल बन चुके इस चौराहे पर कृत्रित जलभराव की निकासी की व्यवस्था आज दिन तक नहीं कर पाई।मुझे हैरानी तो इस बात की हो रही है की माना की शहरी निकाय के हुक्मरानो ने तो भले ही इसके लिए अपनी आंखों पर पटटी बांध ली हो,मगर इस दलदलीय मार्ग से अब तक अनेकों बार उपखंड अधिकारी, तहसीलदार सहित कई आला अधिकारी भी तो इस मार्ग से गुजरे होगे, मगर उन्होंने ने भी इस दिशा मे अब तलक ध्यान क्यों नहीं दिया और ध्यान दिया भी होगा तो पालिका के अधिकारियों को इसकी व्यवस्था सुधारने के लिए क्यों नहीं ताकिद किया।हालांकि माननीय मंत्रीजी का तो इस मार्ग से आना जाना नहीं हो रहा है इसलिए उन्होंने तो अभी यह नजारा देखा भी नहीं है।लेकिन आये दिन जो इस तालाब रूपी मार्ग को बामुश्किल सुरक्षित पार कर गुजरने वाले राहगीर इस तालाब और तालाब मे दुर्घटना के शिकार हो चुके वे दर्जनों लोग शहरी निकाय को न केवल इसके लिए आशिर्वाद दे रहे होगे,बल्कि यह दृश्य देखकर पसन्न जरूर होते होगे।इस मार्ग पर बरसात के दिनों मे बरसाती पानी का भराव होना कोई नई बात नहीं है,मगर बिन बरसात शहर का गंदा पानी नियमित एकत्रित होना पालिका की व्यवस्थाओं की पोल जरूर खोल रहा है।चुकि जलदाय मंत्री का गृह शहर होने की वजह से अपने शहर की पहचान प्रदेश के गिने चुने शहरों के रूप मे होती है,मगर अब यहां ऐसे हालात देखकर हमें तो यही लग रहा है की इस खूबसूरत चांद रूपी शहर मे यह काले धब्बे इसे बदनाम कर रहे है।मेरी यह कड़वी बाते भले शहरी हुकूमत के हुक्मरानो को भले ही कड़वी लग रही होगी और इस कडवाहट मे इस अनाडीकलमकार पर उनको गुस्सा भी आ रहा होगा, लेकिन उन्हें यह भी नहीं भूलना चाहिए की नीम का पेड़ केवल जुबान से चखने पर ही स्वार्थ स्वरूप कड़वा जरूर लगता है,मगर नीम के अन्य गुण इसी कडवाहट के कारण बदनाम है,जैसे अपन बदनाम है।चलते चलते अपन तो यही कहेंगे की हजूर टाइम मिले तो इस चौराहे का एकबार दिदार जरूर कर लेना, अपनी कडवी बात की हकीकत का पता चल ही जाएगा...9413063300

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