...चलो चाय के बहाने अपनी आज नेताजी से चर्चा तो हुई...!
जैतारण/आईबीखांन।
जैतारण की सियासत में अपना सियासती वजूद रखने वाले नेताजी से लंबे समय बाद आज अपनी शिष्टाचार मुलाकात हुई।सलाम दुआ व चाय पान के रस्म रिवायतो के बाद आज नेताजी ने जैतारण की भावी राजनीति पर अपन के साथ जमकर चर्चा करते हुए उन्होंने ने अपन से राजनीति पर जमकर तर्क-विर्तक किये।हालांकि उन्होंने अपनी चतुर राजनीति के साथ उन्होंने अपनी कलम की बीच बीच मे तारीफों के पुलिन्दे भी बाधने मे कोई कमी नहीं रखी।हालांकि मेरा उनसे जुड़ाव वर्षों पुराना है,लेकिन मे यदाकदा मे उनकी आलोचनाएं भी करता हूं जिसे उन्होंने कभी बुरा नहीं माना, यह एक अच्छे नेता की पहचान होती है,जो गुस्सा भी करे मगर उसका अहसास नहीं होने दे।एक बात तो नेताजी की कहनी पड़ेगी वे राजनीति के चतुर खिलाड़ी है,लगभग सवा घंटे तक उन्होंने जैतारण की सियासत का भूत,भविष्य और वर्तमान जानने में अपन को खुब कुरेदने का प्रयास किया, मगर यह अनाड़ी भी लगे हाथ उनकी अतित की यादों को ताजा कर दी।जैसा की नेताजी ने अपने जैतारण के हाल बयां किये, उसे तो अपन हररोज लिख ही रहे है,इस बात को तो नेताजी ने भी स्वीकार किया की आपकी वर्तमान की लेखनी एक विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रही है।नेताजी सिर्फ नेताजी ही नहीं है,वे मंझे हुए कलमकार भी है।एक जमाने ने मे वे भी पत्रकार हुआ करते थे।यह इतेफाक ही है की वे मेरी कलमकारी को पहचानने मे देर नहीं करते और मे उनकी भीतर की राजनीति उनकी मुस्कान देखकर पहचानने मे देर नहीं करता...!उनकी राजनीतिक गणित अच्छे भले नहीं समझ सकते लेकिन वे मेरी कलम को जानतें है और मे उनकी सियासत को...!उन्होंने जैतारण की मौजूदा दशा पर अपने माननीय मंत्री पर जमकर कटाक्ष भी किये और विपक्षी भूमिका मे होते हुए उनको हमेशा करने भी चाहिए, लेकिन उन्होंने नेताश्री की जैतारण मे आमद को लेकर जो कुछ भी कहा वो वाकई मे उन्होंने सच ही कहा जिसका जिक्र मे कई बार कर भी चुका हूं।उन्होंने यह तो स्वीकार किया की आगामी विधानसभा के चुनाव मे टिकट के लिए एकमात्र नेताश्री प्रतिद्वंद्वी है।उन्होंने ने माना की नेताश्री टिकट के मामले मे दिल्ली से लेकर जयपुर तक 10 पैसे वे भारी पड रहे है,लेकिन जैतारण क्षेत्र मे वे इनसे फिलहाल भारी है,और यह सही भी है।चलते चलते उन्होंने मुझसे एक सवाल करके मुझे उलझन मे डाल दिया...!उन्होंने मेरे से यह जानने का प्रयास किया की मेरे लिए टिकट से चुनाव लडना मुफिद रहेगा या स्वतंत्र रूप से...मे उनके सवाल का स्पष्ट जबाब तो नहीं दिया, लेकिन उनके अतित की याद जरूर ताजा कर दी,जैसा की यह सर्वविदित है कि नेताजी के लिए टिकट आजतक हमने मुफिद होता नहीं देखा है।लगभग सवा घंटे तक चली अपनी राजनैतिक चर्चा मे उन्होंने भी शहर की बदहाली पर चिंता प्रकट करते हुए इसके लिए मौजूदा सरकार के हुक्मरानों एवं माननीय मंत्रीजी पर इसका दोषारोपण किया...9413063300
Post a Comment