बाबूजी धीरे चलना,बड़े धोखे है इन राहो मे...!
जैतारण(आईबीखांन)।
बाबूजी जरा धीरे चलना... बड़े धोखे है इन राहो मे...!किसी फिल्म का यह गाना किसी जमाने मे खुब चला था, लेकिन यह गाना इन दिनों जैतारण मे इन दिनों अपने जैसे लोग खूब गुनगुना रहे है।असल मे शहरी निकाय क्षेत्र के हर गली मौड़, चौराहे,सडको पर सीवरेज वालों के रहमो करम से इन राहो मे चलने वाले मुसाफिर धोखे के शिकार जो हो रहे है।शहरी निकाय मे रस्मों रिवाजो के दुनियावी दस्तूर की बुनियाद पर यहां सीवरेज के ठेकेदारों ने जब से सीवरेज लाईन बिछाने का आगाज किया तब से लेकर अब तक यहां हर चीज मे धोखा ही धोखा नजर आ रहा है।सीवरेज के उल्लेखनीय एवं गुणवत्तायुक्त कार्यों की अपन ने बहुत ही तारीफे अब तक कर चुके है और उल्लेखनीय कार्यों की यू भी हमेशा तारीफ करनी भी चाहिए...!दरअसल बात अपन इन राहो मे बड़े धोखे है की कर रहे थे।सुना है की कल जैतारण मे इन्हीं सीवरेज वालों के कारण एक बडे साहब भी अपने बिजलीघर चौराहे के आगे अपनी गाड़ी चलाते चलाते धोखा खा गए।गनीमत यह समझो की उनको और उनकी गाडी को मौके पर उपस्थित लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाल दिया, वरना अपन जैसा कोई अनाडीकलमकार होता तो लोग अपन को जमीदोज कर देते, खासकर सीवरेज वाले...!यहां हर राहो मे इन दिनो हर छोटा बड़ा वाहन चालक धोखे का शिकार होकर दुर्घटना के शिकार हो रहे है,लेकिन हैरत की बात तो देखिए... कोई इन ठेकेदारों पर लगाम तक नहीं लगा पा रहे है।जैसा की अपन यह शुरू से ही यह लिखते आ रहे है की शहरी निकाय के दिगर हुक्मरानों की सीवरेज ठेकेदारों पर रहमदिली के कारण इनके ठेकेदार पालिका के निर्धारित मापदंडो से भी बढकर उल्लेखनीय कार्यो को अंजाम दे रहे है।मगर निकाय के हुक्मरान इनको इसके लिए धन्यवाद देने मे कंजूसी कर रहा है।शायद यही कारण है उनको धन्यवाद नहीं देने के कारण शहर की हर राहो मे वे धोखा ही धोखा दे रहे है।हालांकि ठेकेदारों के कारकूनों ने हमें बताया की उनके उमदा कार्यो पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता...!उनका तर्क लाजवाब है,अंगुली को छोडीए जनाब अपनी शहरी निकाय तो आपके बेहतरीन कार्यों पर यू भी झाकने की हिमाकत नहीं कर रही है।ठेकेदारों का एक तर्क हमें अच्छा नहीं लग रहा है,वो तर्क है की हम इस कार्य की दस साल की गारंटी लेते है,माफ करना जनाब आधुनिकता के इस दौर मे यू भी कोई किसीकी गारंटी नहीं लेता... एक आप ही हो जो गारंटी ले रहे हो।चुकि समय की नजाकत को देखते हुए यू भी अपने पास इन दिनों समय की कमी है,लिहाजा चलते चलते अपन तो यही कहेंगे, बाबूजी जरा धीरे चलना... इन राहो मे बड़े धोखे है...फिल्म आर पार के इस गाने मे तो केवल राहो मे ही धोखा बताया गया, लेकिन अपन तो आज भी यही कह रहे है की यहां तो हर कार्यो मे धोखे ही धोखे है...9413063300
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