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कभी-कभी मेरे दिल मे यह ख्याल आता है,कि जैसे...!

जैतारण(आईबीखांन)।
कभी-कभी मेरे दिल मे ख्याल आता है...जैसे इसको बनाया गया है मेरे लिए...!फिल्म कभी-कभी के इस कर्णप्रिय गाने को सुनकर अपन को भी जैतारण की दशा और दिशा देखकर मन और मस्तिष्क मे ख्याल आते रहते है।दरअसल जब से जैतारण शहर को आधुनिक शहर बनाने के जो जतन शहरी निकाय व्दारा किये जा रहे है,उसे देखकर एक कलमकार होने के नाते अपने जहन मे ये ख्याल आना लाजमी है,क्योंकि इन सीवरेज वालों ने तो इस शहर की हालत ही खस्ता करके रख दी है,जहां देखो वहां इनकी कार्यकुशलता देखने को मिल रही है।अपन सीवरेज योजना के विरोधी नहीं है,असल मे अपना विरोध सीवरेज के बेतरतीब कार्यों एवं पालिका के हुक्मरानों की कुंभकर्णी नीद को लेकर है,अलबत्ता जैतारण जैसी डी श्रेणी की निकाय मे बड़े शहर की तर्ज पर करोड़ों के इस पायलट प्रोजेक्ट को लेकर हम गदगद है।बात सीवरेज के कार्य की चल रही है तो आज फिर इसकी चर्चा हो जाय।इन सीवरेज वालों ने अपने शहर के गौरव माने समझे जाने वाले बस स्टेण्डों के पीछले 17 दिनों से जो हाल बनाकर रखें है,ऐसे हाल शायद ही किसी गांव या ढाणी मे देखने को मिलते होगे, जैसे इन दिनों अपने शहर के बने हुए है।सडक पर जमा दलदल को हटाने के लिए शहरी निकाय एवं सीवरेज वाले मिलकर बस स्टेशन पर नियम विरूद्ध सडक एवं नाले का जो निर्माण किया जा रहा है,यह निर्माण अभी भले ही दुकानदारों एवं आमजनो को इसके दुष्परिणाम समझ मे नहीं आ रहे है,लेकिन अपना भी यह अनुभव रहा है की यहा जो भ्रष्टाचार की बुनियाद पर  जो भी तामीर हो रहा है अथवा किया जा रहा है उसकी असलियत अभी भले ही लोगों को समझ मे नहीं आ रही है,लेकिन इस अनाडीकलमकार को तो इसका भविष्य अभी से दिख रहा है,जैसे महाभारत मे संजय को दिखता था...!असल मे पुरानी सडक पर ही यह लोग सडक बनाने के जो जतन कर रहे है,इससे अपनी पोश अजीम काँलोनी,भाटीयो के बास एवं पुलिस थाना रोड का जो पानी बरसात मे बहकर आएगा वो इस सडक को पार करने की बजाय प्राईवेट बस स्टेशन परिसर मे ही जमा होगा...!और एक दिन वो मंजर हमें देखने को मिलेगा की पूरा बस स्टेशन तालाब का रूप धारण करेगा।पालिका एवं सीवरेज के तकनीकी अधिकारियों ने न जाने ऐसी सडके एवं नाले बनाने की न जाने कहां से तरकीब सीखी जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है।कभी कभी मेरे दिल मे यह भी ख्याल आता है की आखिर शहरी निकाय और सीवरेज के यह ठेकेदार इस शहर को किस शहर की शक्ल दे रहे है,यह अपन समझ नहीं पा रहे है।बस स्टेशन इलाका आम दिनो मे यू भी गंदे पानी से तरबतर रहता है।आखिर यह चाहते क्या है।शहरी निकाय के हुक्मरानों को सीवरेज के कार्यों के बदले भले ही मल्लाई खाने को नहीं मिल रही होगी, लेकिन शहरी आवाम तो इन सीवरेज के कार्यों से इन दिनों जगह जगह धोखा जरूर खा रही है।अपन पिछले चार दिनों से अपने शहर से लापता जरूर है,इसका मतलब यह नहीं की अपन दूर जाकर अपने शहर को यू भूल जाय...!चलते चलते अपन तो यही कहेंगे की रस्मो रिवाजो के दस्तूर से उपर उठकर जिम्मेदार लोग केवल अपने परिवार की नहीं बल्कि सैकड़ों परिवार का भी सोचने का थोड़ा प्रयास करें।हजूर आज तो आप यहां है,कल चले जाएंगे, लेकिन मेरे शहरवासी आखिर जाये तो भी कहा जाये, उनको तो सीवरेज के बेहतरीन कार्यों से अभी से ही घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है।इन सभी बातों को लेकर इस अनाडीकलमकार को फिल्म कभी कभी का वो गाना बार बार याद आ रहा है...!9413063300

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