नेताजी को चिंता नही,बल्कि आत्मचिंतन करना चाहिए...!
आईबीखांन की कलम से...
जैतारण की सियासी मैदान में जब से नेताश्री की आमद हुई है तब से अपने चेहते नेताजी को अपने सियासी वजूद की चिंता सताने लगी है,हालांकि नेताश्री का इस इलाके मे यू तो अवतरण वर्ष 1985 मे ही हो गया था, लेकिन आगामी चुनावों को लेकर नेताश्री की सक्रियता ने अपने लोकप्रिय नेताजी को चिंता में डाल दिया है।हालांकि उनको चिंता करने की यू भी आवश्यकता नहीं है,क्योंकि वे वजनदार नेताजी है और इस क्षेत्र में उनका सियासी वजूद भी है,इनका सियासी वजूद का अंदाजा अपन वर्षों से जानते है,यह अलग बात है की बीते चुनावों मे इस क्षेत्र में विकास के अनेको आयाम स्थापित करने के बावजूद उन्हें करारी पराजय का सामना करना पडा लेकिन वे इस क्षेत्र मे अपनी हार की बगैर चिंता किये वे मजबूती के साथ न केवल सक्रिय रहे अलबत्ता अपनी सियासी कारीगरी से जैतारण नगरपालिका मे अपना बोर्ड बनाकर अपनी चतुर राजनीति का परचम लहराया।लेकिन अपन पिछले कुछ दिनो से यह अनुभव कर रहे है की अपने नेताजी कुछ ज्यादा ही चिन्तित लग रहे है।हालांकि नेताजी पार्टी के साथ साथ बिदास उम्मीदवार के रूप मे भी अपने भावी चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए है,इसबात का प्रमाण उनके मुखारविंद से निकलने वाली छत्तीस कौम की मधुर वाणी से तो यह लगता है की वे बिदास होकर चुनावी उखाड़े मे अपना भाग्य आजमाने मे पीछे नहीं हटेंगे, यू भी उनका यह चुनाव पहला नहीं बल्कि पांचवा चुनाव होगा, मगर शांतप्रिय नेताश्री का संभवतः जैतारण सियासत का पहला ही चुनाव होगा, यह अलग बात है की नेताश्री वर्ष 1985 से ही इस क्षेत्र से चुनाव लडऩे की राह देख रहे है और अबजब आलाकमान से उन्हें संकेत मिले है तो वे इस क्षेत्र मे दौरे पर दौरा करके अपने नेताजी को चिंता मे डाल दिया है।हालांकि जैतारण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की जमात मे नेताजी और नेताश्री के अलावा 52 और ऐसे नेता है जो पार्टी से टिकट की मांग करने के साथ साथ इस क्षेत्र मे शादी विवाह के अलावा शोकाकुल परिजनों को ढाढस बंधाने की आड़ मे अपने आप को बेतौर नेता के रूप मे स्थापित करने का जतन भी कर रहे है और करना भी चाहिए, मगर वे हकीकत से अनजान है।अपन विषय वस्तु से भटक गए है,बात असल मे नेताजी की चिंता की कर रहे थे,हालांकि नेताजी आमतौर पर इस अनाडीकलमकार की सलाह मानते भी है,तो मेरी उनसे सलाह है की वे नेताश्री की चिंता करने की बजाय उन्हें आत्मचिंतन इस बात का भी करना चाहिए की उनको टिकट न मिलने की दशा मे बिदास होकर कैसे चुनावी मैदान मे अपने भाग्य की अजमाईश करनी चाहिए, किनको साथ रखने मे फायदा है और किससे नुकसान है।क्योंकि हमने देखा की नेताजी के इर्द गिर्द रहने वाले अधिकतर लोग नेताश्री के पाले मे है,और कुछ हवाई नेता भी है जिनका राजनैतिक वजूद न तो जनता मे है और न ही अपनी नजरों मे,टिकट इधर उधर होने पर वे बिन बुलाए भी आ जाएंगे, लेकिन उनके पास आप दोनो जैसा राजनैतिक वजूद नहीं है।नेताश्री ने तो ऐसे लोगों को आजादी भी दे दी है,वैसे नेताजी जैसा चुनाव लडऩे का हौसला उनमें नहीं है...9413063300
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