लगाया जाम तो बना काम...!
जैतारण/आईबीखांन।
जैतारण शहरी निकाय के बरसाती पानी के बदइंतजामों एवं सीवरेज वालो की बेतरतीब कार्यप्रणाली की महिनों से रंजो गम से रूबरू हो रहे मेड़ता एवं तालकिया मार्ग के वाशिदों का आज इन इंतजामात को लेकर जो जनाक्रोश प्रकट किया वो शहर के दिगर वाशिंदों को इसे अपनी नजीर के रूप मे लेना चाहिए।दरअसल इस क्षेत्र के लोगों ने आज अपनी मांगों को लेकर लगभग डेढ घंटे तक जैतारण-मेड़ता सड़क मार्ग पर जाम लगाकर शहरी निकाय के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया।इस मार्ग पर शिवसेना कमाण्डो फोर्स के प्रदेशाध्यक्ष अशोक सैनी सहित दिगर लोग शामिल हुए।मार्ग पर जाम होने की खबर मिलते ही अपनी शहरी निकाय के हुक्मरान की शशिचर की छुट्टी का मझा भी किरकिरा हो गया।आनन फानन मे मौके पर पहुंचे निकाय के एलकारो ने उनकी मांगों का जल्द निस्तारण करने का भरोसा भी दिया गया, लेकिन जागरूक लोगों को पहले से ही पता था की निकाय केवल उनका गुस्सा ही शांत कर सकती, न की उनकी समस्याओं का समाधान..।जैसा की अपन हमेशा मेड़ता मार्ग के खुबसूरत नजारों के बारे मे अनेकों बार लिखते भी आए और काम भी हुआ, लेकिन लोगों का आरोप था की इस मार्ग पर पिछले लंबे समय से गढ्ढे पड़े हुए है जिनको शिकायतें करने के बाद भी न तो दुरस्त किया जा रहा है और न ही इस दलदलीय पानी को हटाया जा रहा है।लोगों का कहना था की निकाय की इस लापरवाही के कारण यहां आये दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे है।जब निकाय व्दारा उनको आश्वासन दिये जाने के बाद भी वे मौके से जाम हटाने से इंकार कर दिया, यह खबर पाकर पुलिस और अपने तहसीलदार मौके पर जाकर उनको भरोसा दिलाया की उनकी समस्या का समाधान तीन दिन के भीतर कर दिया जाएगा, तब जाकर उत्तेजित लोग जाम खोलने पर रंजामद हुए।बताया गया है की इस मार्ग को अब शहरी निकाय एवं निर्माण विभाग मिलकर इसे दुरस्त करवाएगा, लेकिन निर्माण विभाग का भी एक तर्क है की असल मे मार्ग को क्षतिग्रस्त किया किसने, और क्यों किया...!यह दोनों का आपसी मसला है अपन इसमें दखल नहीं देगे,लेकिन इन लोगों व्दारा अपनी मांगो को लेकर जो विरोध प्रकट किया उसकी हम तारीफ ही करेंगे, अलबत्ता अपनी शहरी आवाम बड़ी बड़ी समस्याओं का सामना करने एवं उनको झेलने के बाद भी बोलती ही नहीं है।हालांकि न बोलने के पीछे एक नामी लोक कहावत भी जुड़ी हुई है जिसका भावार्थ केवल मेरे मारवाड़ी पाठक ही समझते है...!चलते चलते अपन तो यही कहेंगे की काश शहरी आवाम मेड़ता मार्ग वालों से कुछ सीख लेकर अपनी समस्याओं का लोकतांत्रिक तरीकें से मनवाने का अब जतन करने की तरकीब सीख पाएगें, अलबत्ता ऐसा नहीं करने पर यहां कितने भी चक्कर लगाकर चपले घिस लो समस्याओं का समय पर समाधान न करने की निकाय ने शपथ जो ले रखी है।हमारा उदेश्य लोगों को इसके लिए भडकाने का नहीं बल्कि इसके लिए जागृत करने का है और करना हमारा फर्ज भी है...!9413063300
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