आखिर बम्ब के मामले मे पर्दे के पीछे कौन खेल रहा है राजनीति का खेल...!
आईबीखांन की कलम से
जैतारण नगरपालिका के वार्ड संख्या सात के निर्दलीय पार्षद अशोक बम्ब के निकाय चुनाव 2015 के बाद तीसरी संतान होने की शिकायत होने के बाद यकायक चर्चा मे आये श्री बम्ब के वाकई मे चुनाव के बाद तीसरी संतान हुई है या नही यह जांच का विषय है,लेकिन बम्ब की तीसरी संतान होने के मामले मे शिकायत को लेकर इस अनाडीकलमकार को सियासी साजिश की गंध आने लगी है।असल मे पर्दे के पीछे रहकर जरूर कोई इस मामले को हवा दे रहा है,अलबत्ता इस मामले मे सियासत न होती तो शायद शिकायतकर्ता ने लिखित मे बम्ब पर तीसरी संतान होने की जो शिकायत डीएलबी के समक्ष पेश की उस शिकायत मे जो इबारत लिखी वो इबारत राजनीति का कोई खिलाड़ी ही तैयार कर सकता है।हालांकि जैतारण नगरपालिका के प्रतिपक्ष नेता श्री सुनील राठौड़ इस शिकायती प्रकरण पहले ही दिन यह बता चुके है की न तो वे ऐसी गंदी राजनीति करते है और न ही उनके अन्य सदस्य ऐसा करते है,राठौड़ का तर्क मुझे लाजमी भी लगे,क्योंकि वे हमेशा सकारात्मक राजनीति के हिमायती रहे है..!आखिर सवाल यही उठ रहा है की जब विपक्षी नेता यह कह रहे है तो फिर आखिर वो कौन है जो पर्दे के पीछे खड़े होकर अपना उम्दा खेल खेल रहे है।हालांकि अपन यह इस मामले मे न तो श्री बम्म का पक्ष ले रहे है और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष मे है।यदि शिकायतकर्ता श्री मलाराम उर्फ मलसा की शिकायत मे जैसा वे बता रहे है उनके अनुसार श्री बम्ब के निकाय चुनाव के बाद तीसरी संतान हुई है,दावा तो यहाँ तक किया जा रहा है कि श्री बम्ब ने अपनी पार्षद की कुर्सी की सलामती के लिए उन्होंने जानबूझकर यह भेद छिपाने के लिए उनकी धर्मपत्नी का प्रसव राजस्थान से बाहर दक्षिण भारत के किसी शहर मे करवाया गया...!यदि वाकई मे इन्होंने ऐसा किया है तो इससे तो यही माना जाना चाहिए की उनको पार्षद की कुर्सी का मोह है और वे कुर्सी पर बने रहने के लिए ऐसा कर रहे है।जैसा की अपन पहले ही यह लिख चुके है की नगरपालिका ने भी डीएलबी से प्राप्त शिकायत का हवाला देते हुए श्री बम्ब से स्पष्टीकरण का संशोधित पत्र का बड़ी चतुराई के साथ चार सवाल किये है।पालिका के इन सवालों का जबाब बम्ब कैसे और कब देते है यह अलग बात है।वैसे भी पालिका ने उनको जो नोटिस भेजा गया है उनमें जबाबतलबी की कोई निर्धारित तिथि मुकर नहीं की है,जबकि पालिका को इसकी निश्चित अवधि तय करनी थी,ऐसा अपन नहीं बल्कि शहरी निकाय की वह नियम की किताब कह रही है।मगर पालिका ने बिना अवधि वाला नोटिस कैसे थमाया, अपन इस पचडे मे नहीं पडना चाहते है।चलते चलते अपन तो यही कहेंगे की यदि शिकायतकर्ता की शिकायत मे दम है और जांच मे साबित हो जाता है तो बम्ब को अपनी कुर्सी गवानी पड़ सकती है।और जैसा बम्ब तीसरी संतान न होने का जो राग अलाप रहे है,यदि उनकी बातों मे दम है तो नगरपालिका को बिना देरी किये अपना जबाब चंद दिनो के भीतर दे देना चाहिए।क्योंकि साच को कभी आंच नहीं है और यदि बम्ब जबाब देने में विलंब करते है तो संदेह का दायरा और बढता जाएगा...9413063300
Post a Comment