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...और वे नेताजी बनकर दे गये निर्देश...!


आईबीखांन की कलम से...
अमूमन अपनी शुरू से ही यह बुरी आदत रही है कि अपन अखबार कम ही पढते है,और पढते भी है तो केवल खबरो की हैडलाइने जिससे खबरों का निचोड निकाल लेते, वैसे आमतौर पर हर कलमकार ऐसे ही खबरें पढते है...!लेकिन बीती रात एक अखबार को पढा,और उसकी हैडलाइन देखी जिससे देखकर अपनी जिज्ञासा बढ गई...!दरअसल वाक्य रायपुर चिकित्सालय से जुड़ा हुआ है जहां  दो दिन पहले एक युवक नेताजी बन जा वहां पहुचते है। सफेद पोषाक में दबंग बनकर पहुचे इन नेताजी ने चिकित्सालय का निरीक्षण तो किया ही साथ ही उन्होंने चिकित्सा प्रभारी को कमिया शीघ्र दूर करने के निर्देश भी दे आये। नेताजी के तेवर देख चिकिसा प्रभारी ने भी नही पूछा कि आखिर ये नेताजी आये कहा से ओर सत्ता पक्ष की पार्टी में आखिर है किस ओहदे पर है,क्योंकि आमतौर पर किसी भी दल का सियासी नेता यू सरकारी दफ्तरों का न तो निरीक्षण कर सकते है और न ही किसी अधिकारी को वे निर्देशित कर सकते,हां वे सुझाव अथवा कोई गिला शिकवा हो तो उसे दूर करवाने के लिए उच्च अधिकारियों से उनकी शिकायत जरूर कर सकते है,लेकिन जैसा अखबार मे अपन ने पढा उसके लिहाज से यह नेता चिकित्सको को निर्देश दे रहे है।  जब अपन ने पड़ताल की तो सामने आया कि ये नेताजी रायपुर क्षेत्र के एक गांव के दामाद है। शायद ससुराल क्षेत्र मे अपना रोप गालिब करने आये थे। ये नेताजी असल मे गुलाबी नगरी से ताल्लुक तो रखते है मगर असलियत मे वे कार्मिक है।अपने आप को बड़े नेताओं का करीबी बताने वाले इन नेताजी का आने वाले समय मे सांसद बनने का ख्वाब भी है। रायपुर चिकित्सालय की निरीक्षण की घटना से लगता है ये नेताजी सांसद बनने की शायद रियर्सल करने पर निकले है। मजे की बात तो देखिए इन नेताजी के निरीक्षण दौरे ओर चिकित्सा प्रभारी को निर्देश देने के समाचार एक समाचार पत्र ने प्रकाशित भी कर दिए,मेरा मानना है की ऐसे समाचार मेरा जैसा कोई अनाडीकलमकार ही कर सकता है,अलबत्ता खिलाड़ी कलमकार होता तो उसे यह पडताल करनी चाहिए थी,की जिस नेता की खबर लिख रहे है वो किसी संवैधानिक पद पर है या फिर कोई विधायक, जिला प्रमुख अथवा प्रधान है तो नहीं है,अलबत्ता जनप्रतिनिधियों के रूप मे भी यदि कोई निरीक्षण करता है तो उसके समकक्ष दायरे मे रहकर, लेकिन जैसा अपन ने इस समाचार को पढा तो उसमे तो यही जाहिर होता है की यहां कोई बडा जनप्रतिनिधि आवश्यक दिशा निर्देश दे रहा हो,अपन ने भी खबरों की दुनियां मे एक से बढकर एक खबरें लिखी है और लिखने का जतन भी कर रहे है,लेकिन ऐसी खबर को लिखने का मौका जैतारण मे न तो किसी कांग्रेसी नेता अथवा बीजेपी के नेता ने दिया और न ही उन्होंने कभी ऐसे निरीक्षण किये।हा अपने इलाके के नेताओं की यह तो जरूर खाशियत है की वे अधिकारियों की शिकायतें करने मे माहिर है...! मुझे कोई ये तो बताये की आखिर इन नेताजी को किसने अधिकार दे दिया कि वे इस तरह किसी सरकारी महकमे का निरीक्षण कर किसी अधिकारी को निर्देश देते फिरे। अब जब सब कुछ सामने भी आ गया तो फिर जिम्मेदार मोन क्यो है...!

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