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तो जांच मे साबित हो गया तो गवानी पड़ सकती है कुर्सी...!

जैतारण/आईबीखांन।
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 21  व 24 के तहत 27 नवम्बर 1995 के प्रश्चात दो से अधिक संतान होने के मामले को लेकर जैतारण नगरपालिका के मौजूदा बोर्ड के एक निर्दलीय पार्षद के वर्ष 2015 मे हुए निकाय चुनाव के बाद संतान होने के मामले मे कार्यालय उपनिदेशक(क्षे)स्थानीय निकाय विभाग जोधपुर से एक फरमान अपनी नगरपालिका पहुंचा है,जिसमे निर्दलीय पार्षद के विरुद्ध अधिक संतान होने के स्वायत्त शासन विभाग जयपुर मे दर्ज शिकायत की जांच कर तत्थात्मक रिर्पोट भेजने के निर्देश अपनी नगरपालिका को दिये है।प्रार्थी मलाराम नामक व्यक्ति की लिखित शिकायत मे लिखा है कि जैतारण नगरपालिका के वर्ष 2015 मे निकाय चुनाव मे बेतौर निर्दलीय के रूप मे विजय पार्षद की वर्ष 2016 मे तीसरी संतान होने पर उसे अयोग्य घोषित किया जाय।प्रार्थी व्दारा भेजी गई शिकायत के अनुसार उसनें निर्दलीय पार्षद की पत्नी की मेडिकल जांच करवाकर व इसकी तीसरी संतान सहित की डी.एन.ए.व मेडिकल जांच कर इसकी पुष्टि करने का आग्रह किया है।प्रार्थी व्दारा अधिक संतान के मामले मे की गई शिकायत मे कितना दम है,यह तो जांच पडताल का विषय है,मगर उसके व्दारा इस प्रकार की कि गई शिकायत की यदि नगरपालिका व्दारा उचित जांच पडताल मे सत्यता सामने आई तो जैतारण के एक निर्दलीय पार्षद की सदस्यता पर तलवार लटक सकती है।जैतारण नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी श्री हरीशचंद्र गहलोत ने एक निर्दलीय पार्षद के तीसरी संतान के मामले मे डीएलबी जोधपुर से आई जांच पत्र के नोटिस की पुष्टि करते हुए बताया की इसकी नियमानुसार जांच करवाई जायेगी...9413063300

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