...मै जैतारण हूं।
आईबीखांन की कलम से
मै जैतारण हूं।मुझे इन दिनों आधुनिक शहर के रूप मे भगवान भरोसे से विकसित किया जाने के नाम पर राज्य सरकार करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे है।आधुनिक शहर बनने के लिए मैने कईयो लखपति बनाने के बाद भी मुझे जिम्मेदारो ने अकेले छोडकर मेरी छाती को जगह जगह से छलनी की जा रही है।वर्षों से मेरे नाम का डंका एवं मेरी ख्याति प्रदेशभर मे रही है,लेकिन मे इन दिनो बदनामी का दंश झेल रहा हूं।जब से मुझे आधुनिक शहर के रूप मे मेरा रूप तैयार किया जा रहा है,उससे मुझे घुटन सी होने लगी है।मेरे होकर गुजरने वाले मार्गों की बदहाली को देखकर मे रात के अंधेरे मे अक्सर अकेला ही रोते राते अपने रंजो गम का इजहार करता हूं।वर्षों पहले मेरी सरजमीं से गुजरने वाली अपने जलदाय महकमे की मेरी लाईनो को महफूज रखा मगर अब उनको भी जगह जगह से छलनी किये जा रही है तो आधुनिकता के नाम पर मेरी वर्षों पुरानी सडके भी छिन्न भिन्न हो रही है।मेरी सड़कों पर पहले लोग सुरक्षित चहलकदमी कर लिया करते थे,मगर आज चहलकदमी करना तो दूर मेरी सडके बदहाल होकर मुझे कोस रही है।जगह जगह इन सड़कों पर पड़े गड्ढे भी मुझे से नाराज है।मे वहीं जैतारण हूं जहां मैने एक से बढकर एक नेता दिये, लेकिन मेरा दुर्भाग्य तो देखिये कोई नेता न तो मेरा और नहीं मेरे लोगों की खैरियत तक नहीं पूछ रहे है।मे वहीं जैतारण हूं जहां आसपास के दर्जनो गांवो के लोग मेरे पर भरोसा कर सुरक्षित आते जाते थे,लेकिन मेरी दशा को देखकर अब उनकी यहां आने कि हिम्मत नहीं हो रही है।मेरे यहां आने वाला हर मार्ग अब उनकी राहे रोक रहा है।मे जैतारण हूं और मेरी जनता इतना कुछ होने के बावजूद चुपचाप यह गम सहन कर रहे है।आज जब कोई प्रवासी भाई मेरे नाम से यहां आते है तो वे मेरी दशा और दिशा को देखकर मुझ पर तंज कसते है और मे मूक बनकर उनके समक्ष अपनी शर्मिंदगी का इजहार तक नहीं कर पाता हूं।यहां मुझे आधुनिक बनाने के फेर मे मुझे हर जगह से तौडकर रख दिया है।मे आधुनिक शहर की शक्ल ले भी पाऊगा या नहीं यह मेरे पर अब निर्भर नहीं है,मुझे तो कुछ लोगों ने उन जंजीरों मे जखड कर रख लिया है जिससे मे कब मुक्त हो पाऊंगा यह मुझे भी पता नहीं है।मे जैतारण हूं और जैतारण ही रहूंगा, लेकिन मेरी हालत इन दिनो बिगडी हुई है...! 9413063300
Post a Comment