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दुपट्टा पर यह कैसी सियासत, भविष्य मे अधिकारी स्वागत से तौबा करे...!

आईबीखांन की कलम से...!
जैतारण/रायपुर
जैतारण के पडौसी रायपुर उपखंड अधिकारी मोहनलाल खटनावलिया एवं दिगर अधिकारियों व्दारा पिछले दिनो गिरी ग्राम मे आयोजित एक कार्यक्रम मे भाजपा के उत्साहित कार्यकर्ताओं व्दारा उनको मारवाड़ी परम्परानुसार स्वागत की रस्मो रिवाज के तहत एक पार्टी का दुपट्टा पहनाकर स्वागत करने के मामले को लेकर पिछले दो-तीन दिनों से श्री खटनावलिया के खिलाफ कार्यवाही करने की जो मांग की जा रही है,वो मांग उनकी नजर मे भले ही जायज हो,लेकिन एक अधिकारी के खिलाफ जो सियासी खेल खेला जा रहा है वो कतई उचित नहीं है।दरअसल,माननीय मंत्री सुरेंद्र गोयल के सरकारी कार्यक्रम मे पोटोकोल के तौर पर हर अधिकारी को यू भी साथ जाना पडता है और श्री खटनावलिया एवं दिगर अन्य अधिकारी अपनी डूयूटी का पालन करने के लिए वहां गए।अब इस कार्यक्रम मे ग्राम के उत्साहित लोगों अथवा कार्यकर्ताओं ने माननीय मंत्रीजी के स्वागत के साथ साथ उनका भी स्वागत कर दिया।यह दिगर बात है कि उन लोगों ने अपने पडौसी उपखंड अधिकारी खटनावलिया को माला एवं साफा के साथ साथ वो डूपटा भी पहना दिया गया...!इसमें मुझे नहीं लगता की खटनावलिया ने वो डूपटा मंत्रीजी को खुश करने के लिए पहना हो...!यहां यह उल्लेखनीय है कि  मंच के माध्यम से जब स्वागत के लिए किसी का नाम पुकारा जाता है तो लाजमी है कि नाम की उदघोषणा करने वालो को कोई भी यह नहीं कह सकता की वे अपना स्वागत नहीं चाहते।मुझे लगता है कि श्री खटनावलिया के साथ भी यही हुआ, उनके नाम की मंत्रीजी के सामने उदघोषणा हुई होगी, ऐसी स्थिति मे वे न तो मना कर सकते थे और न ही उन लोगों को माला एवं दुपट्टा के लिए यह कहने की स्थिति मे रहे की यह नहीं पहनुगां।श्री खटनावलिया राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है और उन्हें यह भी ज्ञात है रहा होगा की वे सिर्फ सरकारी कार्यक्रम मे ही शिरकत कर सकते है न किसी पार्टी विशेष के कार्यक्रम मे,लिहाजा खटनावलिया के डूपटा पहनने के मामले पर राजनीति न की जानी चाहिए..!वैसे दुपट्टा किसी पार्टी की बैठक मे नहीं, अलबत्ता सरकारी कार्यक्रम मे पहनाया गया, ऐसे मे बडा सवाल यह भी है कि माननीय मंत्रीजी को भी अपने कार्यकर्ताओं को यह ताकिद करना चाहिए था कि यह सरकारी कार्यक्रम है,न कि पार्टी स्तरीय बैठक, लिहाजा अधिकारी भी ऐसी स्थिति मे राजनीति के शिकार हो जाते है।माननीय मंत्रीजी को अब इस दुपट्टा वाली राजनीति भविष्य मे कई और न हो इसके लिए अपने किसी भी कार्यक्रम मे अधिकारियों के स्वागत सत्कार कार्यक्रम पर अपने पोर्ट्रोकोल पर सियासत करने वालों पर अपने बयान जारी कर यह स्पष्ट करना चाहिए की गिरी ग्राम का वो कार्यक्रम किसी पार्टी का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रम था,जिससे की खटनवालिया की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह न लगे...!दुपट्टा मामले को लेकर सियासत को हवा देने वालो को यह भी नहीं भूलना चाहिए की एक जमाने मे कई अधिकारी एक पार्टी विशेष की पर्दे के पीछे जमकर राजनीति किया करते थे,लेकिन खटनावलिया तो शायद ऐसा नहीं कर रहे है।दुपट्टा प्ररकरण को लेकर कल रायपुर के कुछ कार्मिकों ने भी श्री खटनवालिया का पक्ष लेते हुए मुख्य सचिव के नाम पत्र लिखा, मुझे उन कार्मिकों का यह कृत्य भी अच्छा नहीं लगा...!जिन्होंने भी ऐसा किया उससें दुपट्टा की सियासत रूपी आग मे घी डालने का काम किया।खटनवालिया जैसी स्थिति अनेकों बार इस अनाडीकलमकार के साथ भी अमूमन होती है,जहां कई अपन को ऐसी स्थिति से गुजरना पडता है,इसका मतलब यह नहीं की अपन किसी पार्टी विशेष के कार्यकर्ता हो गए... स्वागत सत्कार की यह मारवाड़ की सदियों से परम्परा रही है।हालांकि दुपट्टा मामले मे वैसे तो श्री खटनवालिया ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया, लेकिन एक अनाडीकलमकार होने के नाते मेरा मानना है कि भविष्य मे उनको ऐसे स्वागतो से तौबा कर लेनी चाहिए... और दिगर अधिकारियों को भी इससे सबक लेना चाहिए। बहरहाल दुपट्टा प्रकरण पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।राजनीति करने के और बहुतरे तरीकें भी है।हो सकता है मेरी यह बात किसी को कडवी भी लग रही होगी, लेकिन इस मामले को अब विराम दे देना ही बेहतर है,क्योंकि मंत्रीजी की इच्छा बगैर न तो खटनवालिया का तबादला होगा और न ही कोई कार्यवाही...9413063300

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