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मेरी उतर गुजरात चुनाव कवरेज की 15 साल पुरानी यादें...!

आईबीखांन की कलम से....
जैतारण
बात उन दिनों की है जब मे अजमेर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार का जैतारण संवाददाता था।गुजरात के गोदरा प्रकरण के बाद वर्ष 2002 मे इसी दिसंबर माह की कडाके की सर्दी मे गुजरात विधानसभा के आम चुनावो का चुनावी प्रचार अभियान अंतिम चरण मे चल रहा था,चुकि मुझे राजनीति चुनावी कवरेज करने का शुरू से ही शौक रहा है,अतः जैतारण के तत्कालीन युवक कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीपसिंह खिनावडी के साथ उतर गुजरात की आदिवासी बाहुल्य दांता विधानसभा क्षेत्र मे छ:दिनों तक विभिन्न गांवों का भ्रमण करने एवं वहां के लोगों से मेल मिलाप करने का अवसर मिला,मतदान के ठीक एक रात पहले हम पाटण नामक एक गांव मे पहुंचे जहां वहां के एक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान की गाडी देखकर हमे कुछ और ही समझ कर घेर लिया।अंजान इलाका होने के बावजूद हम उनसे तनिक भी नहीं घबराएं, आखिर मे मैने अपना अखबार का कार्ड बताया और उन्हें समझाया की हम चुनावी कवरेज के लिए राजस्थान से आए हुए है,तब जाकर उन्होंने हमें छोडा और चाय एवं भोजन के लिए आमंत्रित किया, चुकि दूसरे दिन मतदान था,इसलिए मे और मेरे परम मित्र प्रदीपसिंह खिनावडी सुबह जल्दी तैयार होकर विभिन्न मतदान केन्द्रों पर पहुंचे।लेकिन एक गांव मे गुजरात पुलिस एवं वहां के मतदान बूथ अधिकारी ने बिना इजाजत मतदान केन्द्र मे प्रवेश करने पर पकड लिया।हालांकि बनासकांठा जिला निर्वाचन अधिकारी से हम दोनों ने मतदान केंद्र मे प्रवेश होने की लिखित इजाजत ले रखी थी,लेकिन जल्दबाजी मे हम उस पत्र को एक गेस्ट हाउस मे भूल गए।यहां हमारे लिए बडी मुश्किल खडी हो गई।पुलिस हमें पकडऩे लगी,तब एक सज्जन पुलिस अधिकारी ने मेरे अखबार का कार्ड देखकर हमें वहां से सुरक्षित निकाल दिया...।
*मतदाता नहीं बताते अपनी राय*
उतर गुजरात के दांता विधानसभा क्षेत्र के छ:दिनों के प्रवास पर हमने दर्जनों गांवो का दौरा किया, लेकिन मैने उन दिनों यह अनुभव किया की गुजरात के मतदाता चुनाव के लिए न तो अपनी राय प्रकट करते और न ही कोई जीत हार का समीकरण बताते, मैने मुस्लिम बहुल्य गांवो का भी उस समय दौरा किया, लेकिन उन्होंने भी अपनी राय नहीं दी।हालांकि वहां के चुनावी माहौल से हमें यह आभास हो गया था कि दांता विधानसभा मे कांग्रेस ही विजय होगी, और जब चुनाव परिणाम आए तो पता चला की दांता विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी मुकेशभाई गढवी 30 हजार रिकॉर्ड मतो से विजय रहे थे।उनके प्रतिद्वंद्वी बनासकांठा जिला प्रमुख थे, जिनका मे नाम भूल गया वो भाजपा के प्रत्याशी थे,और वे पराजित रहे तथा  जमानत जप्त होते होते बच गई थी।
*बाहरी नेताओं का नहीं होता असर*
उतर गुजरात का पन्द्रह साल पहले चुनावी कवरेज के सिलसिले मे छ दिनों तक दांता विधानसभा क्षेत्र मे रहने का मौका मिला जहां मैने यह अनुभव किया की वहां के मतदाताओं पर बाहरी नेताओं का कोई असर नहीं पडता, नेता चाहे कांग्रेस का हो अथवा भाजपा, अलबत्ता कोई जमात का हो,मगर वहां के मतदाता इतने होशियार है की वे अपना वोट अपने विवेक से ही देते है,उन्हें स्थानीय (गुजराती)नेता ही पसंद है।यह दिगर बात है कि अपने यहां के कुछ नेता इन दिनों सोशियल मीडिया पर अपने चुनावी प्रचार अभियान की तस्वीरे ऐसे साझा कर रहे है की जैसे गुजरात के मतदाताओ पर उनकी गहरी पकड़ है,अव्वल तो यह है की गुजरात के ग्रामीण मतदाताओं को न तो हिन्दी और न ही मारवाड़ी भाषा समझ मे आती है...!
*भाजपा की बनेगी सरकार...!*
गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों को लेकर इन दिनों पूरे गुजरात मे इस कडाके की सर्दी के बीच राजनेतिक गर्महाट जारी है।सियासी झुमलो एवं आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। कांग्रेस भले ही हार्दिक पटेल एवं दिगर नेताओं के साथ मिलकर इन दिनों गुजरात की 22 साल पुरानी भाजपा सरकार के नाक मे दम कर रखा है।स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी अपने गृह प्रदेश मे रैलियों पर रैलियां कर चुनाव प्रचार मे व्यस्त है।चुकि मुझे गुजरात चुनाव का मामूली अनुभव है और इसी आधार पर यह कह सकता हू की वहां भाजपा फिर से सत्ता मे आएगी, यह दिगर बात है की भाजपा को अबतलक कडी मेहनत करनी पड रही है...9413063300

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