आखिर विकास के नाम पर यू कब तक उडती रहेगी यह धूल...!
जैतारण(आईबीखांन)
खबर का शिर्षक पढकर आप जरूर चौक गए होगे, लेकिन यह परम सत्य है कि जैतारण शहरी निकाय परिक्षेत्र मे इन दिनों विकास के नाम पर धूल उड रही है...!दरअसल शहरी निकाय परिक्षेत्र मे डेढ-दो साल पहले शुरू किये गये सीवरेज लाईन बिछाने के कार्यों के लिए सीवरेज के ठेकेदारों व्दारा उखाडी गई सडको का इनके व्दारा उल्लेखनीय पुर्ननिर्माण किया जा रहा है,जहां ठेकेदारों ने सी.सी.सडक की उल्लेखनीय गुणवत्ता को छिपाने के नाम पर निर्मित हो चुकि सडको पर जल तराई करने के नाम पर इन सडको पर बजरी बिछाकर यदाकदा पानी का छिडकाव कर इन सडको से पुनः बजरी नहीं हटाने के कारण यह बजरी इन दिनों वाहनों की आवाजाही के कारण मिट्टी के रूप मे तब्दील हो चुकि है,जहां इन सडको पर मिट्टी की परतें जमने के कारण आये दिन इन सडको पर वाहनों के निकलते ही धूल के गुबार उडते है,जैतारण नेत्र चिकित्सालय से लेकर तहसील कार्यालय तक के मुख्य मार्ग पर तो इन दिनों धूल के गुब्बारों ने आमजन को खासा परेशान कर रखा है।सुबह से लेकर देर शाम तक उडने वाली यह धूल इन दिनों मानव जीवन के लिए खतरा बन गई है।लगातार धूल के गुबार से रूबरू होने वाले कई लोग इस कारण धीरे धीरे अस्थमा के रोगी बनने लगे है तो,अनेक लोग इस बढती परेशानियों से निजात पाने के लिए अब इन खुली सडको पर चहदकदमी करते समय अपने मुंह पर मास्क लगाने को विवश है।ऐसे हालत शहर की अन्य सडको पर भी बने हुए है,लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा की शहरी निकाय के हुक्मरानों का ध्यान आमजन के बिगडती सेहत पर नहीं जा रहा है।जैसा की पाठकों को याद होगा की मैने शहर की सडको पर उडने वाली इस धूल की समस्याओं को लेकर अपने माननीय मंत्री सुरेंद्र गोयल को भी मेरी एक खास मुलाकात के दौरान अवगत करवाया था,लेकिन उन्होंने भी सीवरेज के विकास कार्यों के दौरान धूल उडना सामान्य बात बताकर भले ही मेरे सवाल को टाल दिया था,मगर हकीकत यह है कि शहरी आवाम इन दिनों विकास के नाम पर शहर की सडको पर उडने वाली धूल से खासा परेशान है।सबसे बडा सवाल यह है कि यदि इन सडको का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है तो क्या सीवरेज के ठेकेदारों की यह जिम्मेदारी नहीं बनती की वो अपने व्दारा सी.सी.सडको पर बिछाई गई बजरी को अब हटाकर उसे साफ किया जाय...!क्या शहरी निकाय के हुक्मरान भी इतने बेबस हो गए की वो सडको पर जमा मिट्टी को हटाने के लिए सीवरेज के ठेकेदार को इतना भी आदेश देने की स्थिति मे नही है क्या...!जैतारण शहर के जाने माने चिकित्सकों की माने तो शहर मे उडने वाली यह विकास रूपी धूल मानव जीवन के लिए खतरा बन रही है।उनके अनुसार यह धीमा जहर उनके स्वास के माध्यम से शरीर मे प्रवेश कर रहा है जो मानव जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है।मेरी बात भले ही जिम्मेदार लोगों को कडवी लग रही होगी, मगर यह सत्य है कि शहरी आवाम विकास रूपी शहर मे उडने वाली धूल से खासा परेशान है।इस अनाडीकलमकार की बात पर यदि जिम्मेदारो को यकीन नहीं हो तो वे शाम के समय शहर की सडकों पर निकलकर देख ले...।यदि शाम को समय नहीं मिले तो वे अलसुबह किसी प्रमुख सडक किनारे स्थापित किसी दुकान का हाल देख ले,जिससे उनको वास्तविकता का अंदाजा सहज ही लग जाएगा, उन दुकानों पर यह विकास रुपी धूल की परतें जमी हुई यदि न दिखे तो कसम खुदा की हम लिखना छोड देगे।आखिर मे चलते चलते अपने तो यही कहेंगे की शहर मे निस्संदेह सडको का विकास हुआ है,मगर अब जिम्मेदारो की यह जिम्मेवारी बनती है की वे शहर की सडकों पर उडने वाली धूल से आमजन को होने वाली परेशानियों से निजात दिलाने की आगे आकर पहल करे...!9413063300
Khanib786@gmail.com
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