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नेताश्री की आमद से अब बदलने लगी सियासी बयार...!

-आईबीखांन की कलम से
जैतारण की सियासती फिजाओं मे दिन ब दिन बदलाव की बयार बह रही है,इस बयार मे धीरे धीरे सबकुछ बदलने लगा है खासकर कांग्रेसी जमात मे...!कल सोमवार को ईद उल फ़ितर के पर्व पर अपने नेताश्री ने जैतारण के अल्प संख्यक वर्ग को अपनी नव निर्वाचित ज़िला कांग्रेस की आधा दर्जन कार्यकारणी को साथ कर न केवल मुबारकबाद दी वरन इस बहाने यह संदेश भी दे दिया कि आगामी विधान सभा चुनाओ में वे भी जैतारण से एक सम्भावित सशक्त कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते है...!जैसा की यह अनाड़ीकलमकार  लगातार इस बात का पूर्वमान लगा चुका है और अपने सुधि पाठकों के साथ भी इस बात को साझा कर चुका है कि इस बार जैतारण विधान सभा के दो मुख्य दावेदारों में एक जमे जमाए नेताजी  और एक ये नेताश्री हो सकते है,और इसका आभास अपने नेताजी और उनके समर्थकों को भी हो गया की इसबार टिकट की उनकी राह मे एक मात्रा कोई रोड़ा है तो वो नेताश्री ही है,अलबत्ता नेताजी की जमी जमाई जाजम को उखाड़ने की अन्य किसी भी स्थानीय नेता की बिसात ही नहीं है,शायद मेरी बात धीरे धीरे सच साबित हो रही है,यदि ऐसा नहीं है तो फिर लोगों की जुबां पर नेताश्री की सक्रियता के किस्से यू चर्चा मे नहीं आते। यह बात दीगर है कि नेताश्री कि डगर थोड़ी  कठिन है।
क्योंकि अमूमन जैतारण के अल्प संख्यक वर्ग के त्योहारो में नेताजी कि अच्छी पकड़ रही है, चाहे वो ईद हो या उर्स अथवा मोहर्रम पर,लेकिन कल नेताश्री कि उपस्थिति ने तो अपने पुराने नेताजी कि त्योरियो में बल ज़रूर डाल दिए होंगे,क्योंकि नेताश्री ने भी इस वर्ग मे इस बार धमाकेदार एन्ट्री कर अपनी उल्लेखनीय आमद तो दर्ज करवा दी है। इस अदने कलमकार को यह भी अनुमान है कि आने वाला समय कांग्रेस संगठन के लिए उठापटक वाला होगा, यही मान कर अपने वर्तमान विधायक और क़ाबिना मंत्रीजी कि बाँचे इन दिनो जैतारण कांग्रेस की बदलती सियासी बयार को देखकर ज़रूर खिली हुई नज़र आ रही है,इसका आकलन इस अनाड़ीकलमकार ने भी किया है,क्योंकि कांग्रेस की इस खिचतान मे माननीय मंत्रीजी के चेहरे पर भी इन दिनो काफी रौनक दिखाई दे रही है।
वैसे अपनी आदत शुरू से ही जैतारण के सियासतदानों को मुफ्त मे सलाह देने की रही है तो लगे हाथ नेताश्री को भी अपन की मुफ्त की एक सलाह है की वे अपनी चोकडी को छोड़ कर कुछ ज़मीनी नेताओं को भी करीब लाने का थोड़ा जतन करे,क्योंकि फिलहाल नेताश्री के पास नेताओं की तो भरमार है,लेकिन कार्यकर्ताओं का थोड़ा टोटा मुझे नजर आ रहा है और नेताजी को अपने ज़नाधार को बचाने का भी जतन करना होगा, क्योंकि उनके जनाधार मे भी अब पहले वाला जलवा नहीं है जो 1998 से 2008 तक हुआ करता था,
आने वाले त्योहार दीपावली पर जैतारण के बाज़ार में परम्परागत रूप से जो भावी प्रत्याशी रामा श्यामा करते है वो इस पटकथा का पटाक्षेप करेगा।
वैसे नेताश्री सन ऊनीस सो पिच्याशी से जैतारण से अपनी दावेदारी कर रहे है, लेकिन वो कभी भी जैतारण के संगठन में इतनी पकड़ और रुचि नही दिखा पाए जितनी वर्तमान में दिखा रहे है शायद उन्हें कांग्रेस आला कमान से कोई ठोस आश्वासन मिल गया लगता है जो इन दोनों जैतारण की सियासत मे अपनी लगातार सक्रियता दिखा रहे है।वैसे सोशियल मीडिया मे तो कई नेता नेताश्री और नेताजी से भी कई अधिक सक्रिय है,लेकिन उनकी इस सक्रियता से अपन को नहीं लगता की उनको कुछ अर्जित होगा। जैतारण मे सोशियल मीडिया मे तो सबसे अधिक सक्रिय यह अनाडी भी है,मगर अपन को राजनीति से कोई वास्ता नहीं है और सोशियल मीडिया की सक्रियता से वैसे भी टिकट थोड़ी मिलती है। वैसे कल के मुबारकबाद के मौके पर भा ज पा के राज में अल्प संख्यक का कांग्रेस से मिले इस समर्थन से गदगद नज़र आए जहाँ एक और नेताजी और नेताश्री के अलावा कई युवा तुर्क भी मौजूद थे। वैसे जैतारण के वर्तमान विधायक जी को जहाँ तक में जानता हू वो क़तई साम्प्रदायिक विचार धारा में विश्वास नही करते और उनकी कार्यशैली के अपन भी कायल है,लेकिन उनकी पार्टी के विरोधी उनको उनकी इसी विचार धारा एवं उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते है,यह दिगर बात है।चलते-चलते अपनी तो उन दिगर नेताओं से यही सलाह है की नेताश्री की जैतारण मे सियासती सक्रियता से अब यह समझने मे देर नहीं करनी चाहिए की अब जैतारण की सियासत मे नेताश्री और नेताजी के अलावा पंजे वाली पार्टी मे दूसरो चमकदार नेता नहीं है...! मेरी बात उनको नीम से भी अधिक कडवी लग रही होंगी, लेकिन परम सत्य यही है की जब तक स्थानीय सियासी अखाड़े मे नेताश्री और नेताजी जमे हुए है तब तक उनको मौन धारण कर लेने मे ही अपनी भलाई है।वैसे वे राजनीति करें तो अपन को यू भी कोई एतराज नहीं है...!9413063300

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