और तारीफ करू क्या मे उनकी जिसने यह...!
जैतारण/आईबीखांन।
अपनी शहरी निकाय मे इन दिनों चल रहे तीव्रगति से सीवरेज लाईनो के बिछाने के कार्यों की जितनी भी तारीफ की जाय उतनी ही कम है।तारीफ इनके के कार्यों की गुणवत्ता की नहीं और न ही इनके सी.सी.सड़को के निर्माण कार्यों मे काम ली जाने वाली उमदा सामग्री, अलबत्ता तारीफ कर रहे है आज इनके कार्यकुशलता की जहां सीवरेज वाले इन दिनों ढाई दिन मे अढाई कोस की दूरी तय कर रहे है।यदि यह ऐसा नहीं करते तो आज जैतारण का गौरव समझे जाने वाले शहर के सरकारी और प्राईवेट बस स्टेशन इन दिनों अपनी बदहाली पर यू आंसू न बहाते।इन सीवरेज वालों के उल्लेखनीय कार्यों की बदौलत जहां शहर के कुछ इलाकों मे पिछले दस दिनो से अपना जल महकमा चाहकर भी जलापूर्ति नहीं कर पा रहे है तो शहर की आधी आबादी के बेसिक टेलीफोन सेवा भी मृत्यु की शैय्या पर पडी है।प्राईवेट बस स्टेशन इलाका इनकी कार्यकुशलता के कारण आज विरान नजर आ रहा है तो इस इलाके मे लगी दुकानों के दुकानदार इनकी मेहरबानी से अपनी दुकानें खोलकर पिछले दस दिनों से ग्राहकी का इंतजार कर रहे है।दस दिन पहले मेरी अपनी पोश काँलोनी से बाहर निकलकर सीवरेज वालो ने प्राईवेट बस स्टेण्ड से न जाने किस मुर्हुत मे यहां लाईन बिछाने का श्री गणेश किया था,वो काम पिछले दस दिनों से बीच राह मे अटक गया है...!शहरी निकाय एवं दिगर तकनीकी अधिकारियों की गैर मौजूदगी मे चल रहे इनके इस बेहतरीन कार्यों को देखकर इस अनाडीकलमकार को भी आज अपना बचपना याद आ रहा है,जब अपन मासूम हुआ करते थे तब अपन को बरसात के दिनों मे मिट्टी के घर बनाने एवं उनको बार बार बिखेरने मे बडा मझा आता था।और मे पिछले दस दिनो से यहां जो देख रहा हू शायद सीवरेज वाले भी यही खेल खेल रहे है।पिछले दस दिनों मे न जाने बामुश्किल बीस कदम दूरी की इस सडक पर चलने वाली जेसीबी मशीन दिन रात चल रही है मगर अब तक इसका नतीजा कुछ नहीं निकल पा रहा है।नतीजे के नाम पर इन्होंने जलदाय विभाग की वर्षा पुरानी भूमिगत पाईपों को जगह जगह से नेस्तनाबूद ही किया तो दूर संचार विभाग की केबलो को तहसनहस करके रख दिया है।लोग इनका यह खेल पिछले दस दिनों से मुक दर्शकों की तरह देख रहे है।हालांकि अपन को एक परम ज्ञानी ने जो बात बताई उनकी बात भी काबिल-ए-तारीफ है,उनका कहना था की हथेली मे आम नहीं उगता, वाकई मे आपका तर्क लाजवाब था,लेकिन अपने इन्हीं सीवरेज वालों को विभिन्न गलीयों-चौराहा पर ऐसे आम उगाते देखे भी है,और इनके ही हाथों से उगाये आम आज अपन शहर के मेडता चौराहा, गौशाला, निम्बाज रोड़ इत्यादि जगहो पर आसानी से देख सकते है और लोग इनके आमो से दुखी भी है।खैर अपन को वैसे भी आम खाने का शौक यू भी कम है और खिलाने के जतन भी किये लेकिन अपन आम नहीं खाते।असल मे अपन विषय से भटक रहे है।बात इनके तारीफों की चल रही थी तो बता दे की यहां पिछले दस दिनो से इनकी जेसीबीया चल रही है,लेकिन नतीजा अभी तक कुछ नहीं निकला है।न तो जलदाय विभाग की लाईन दुरस्त हो पाई है और न ही टेलीफोन लाईन ठीक हो पा रही है।सीवरेज वाले अपनी धुन मे मस्त है,लेकिन जनता इनके कार्यों से त्रस्त है।यह तय है की सीवरेज वालों की मेरी बातें बुरी भी लगेगी,लेकिन सच्चाई तो महाराज सच्चाई ही होती है...!9413063300
खांन मीडिया जैतारणके आईबीखांन की रिपोर्ट
Post a Comment