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खर्चा निकाय करे और अध्यक्षता कोई और करे...!

जैतारण(आईबीखांन)।
जैतारण उपखंड मुख्यालय पर आयोजित होने वाले स्वाधीनता दिवस समारोह मे शुरू से ही यह रिवायत रही है कि इस राष्ट्रीय एवं सरकारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मौजूदा उपखंड अधिकारी तथा अध्यक्षता मौजूदा पुलिस उप अधीक्षक जो भी पदास्थापित हो करने की चली आ रही है,लेकिन बुधवार को अपने जैतारण उपखंड मुख्यालय पर इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आहूत की गई खंडस्तरीय अधिकारियों की बैठक मे अपने शहरी निकाय के मुख्याजी ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए जो तर्क पेश किया गया वो किसी को लाजमी नहीं लगा,उनका तर्क भी यू देखा जाय तो लाजवाब नहीं था।दरअसल मुख्याजी का तर्क था की जब गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोह शहरी निकाय क्षेत्र मे आयोजित होते है और इनके आयोजन का खर्च का बोझ भी निकाय उठाती है तो फिर इन कार्यक्रमों मे अब तक शहरी निकाय के जीतने भी मुख्या रहे है,उनको इन कार्यक्रमों मे विशिष्ट अतिथि का ही दर्जा क्यों दिया जाता रहा है,जबकि ऐसे आयोजन उनकी जरे सदारत मे होने चाहिए...!माफ करना मुख्याजी प्रोटोकॉल के तहत जहां जहां भी उपखंड मुख्यालय है वहां ऐसे कार्यक्रमों के मेहमान ए खसूशी उपखंड मुख्यालयों पर तैनात यह दोनों अधिकारी ही बनते है।हां किसी कारणवश यदि ऐसे आयोजन मे उपखंड अधिकारी गैर मौजूद रहते है तो उनके स्थान पर मौजूदा तहसीलदार जो भी है, वे कार्यक्रम मे बेतौर मुख्य अतिथि बनते है।ऐसा मौका मुख्याजी आपने भले ही नहीं देखा होगा, मगर अपन ने एकबार जैतारण के तत्कालीन तहसीलदार को ध्वजारोहण करते देखा है।यही नहीं इन कार्यक्रमों का एक प्रोटोकॉल यह भी है कि जहां भी उपखंडस्तरीय यह दो राष्ट्रीय पर्व आयोजित होते है वहां शहरी निकाय के मुख्याजी ही क्या उस क्षेत्र का विधायक न तो कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि और न ही अध्यक्षता करते है,अलबत्ता कई विधायक तो ऐसे प्रोटोकॉल के कारण इन कार्यक्रमों मे इसके लिए भाग तक नहीं लेते है।यह दिगर बात है की राष्ट्रीय कार्यक्रम से इतर, यहां आयोजित होने के बाद होने वाले अन्य किसी कार्यक्रम मे आयोजको की इच्छानुसार उनको मुख्य अतिथि अथवा अध्यक्षता करवा सकते है,लेकिन इन दोनों ही राष्ट्रीय पर्वों पर मुख्य अतिथि उपखंड अधिकारी एवं अध्यक्षता उप पुलिस अधीक्षक ही करते है,बेसर्त की वहां उपखंड मुख्यालय व कार्यक्रम उपखंडस्तरीय होना चाहिए।इस कार्यक्रम मे पंचायत समिति के प्रधान तक को भी विशिष्ट अतिथि का ही दर्जा दिया जाता है।मुख्याजी मेरी बात असल मे कडवी जरूर लगेगी, लेकिन इस अनाडीकलमकार को जितना अनुभव था उसे बताने का पूरा जतन किया है।रही बात खर्च खाते की तो यह खर्च करने अथवा न करने से इस कार्यक्रम मे न तो फेरबदल होते है और न ही कोई प्रोटोकॉल की सीमाओं का उल्लंघन कर सकते है।हमारी भी शुरू से यही तमन्ना रही है की इन राष्ट्रीय पर्वों के प्रोटोकॉल नियमों मे अब बदलाव किये जाने चाहिए ताकि अन्य जगहों पर भी पंच प्रधानो को अतिथि बनने का गौरव हासिल कर सके,जैतारण जैसी स्थिति अपने पडोसी रायपुर की कुछ ऐसी ही बनी हुई है जहां रायपुर मे यह दोनों पर्व उपखंडस्तरीय रूप मे आयोजित होते है,मगर यू देखा जाय तो जैतारण मे तो शहरी निकाय है,रायपुर तो अपने आप मे ग्राम पंचायत ही है।चलते चलते अपन तो यही कहेंगे की खर्च खातों की आड मे प्रोटोकॉल नहीं तौडे जा सकते...!हालांकि राष्ट्रीय पर्व पर अध्यक्षता करने की खुसर फुसर अपन पिछले कई दिनों से शहरी निकाय मे सुनने आ रहे थे,और मुख्याजी के ऐसे कार्यक्रम मे अध्यक्षता करने पर एक बैठक मे सूना है चर्चा भी हुई थी,जो आज इस बैठक मे यह बात निकल कर बाहर ही आ गई...94130633300

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