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...तो क्या यह फव्वारे सर्दीयो मे चलाओगे क्या...?


जैतारण(आईबीखांन)। जैतारण शहर के सौन्दर्यकरण को बढावा देने के उद्देश्य से कोई डेढ दशक पहले भारतीय कृर्षि बीमा कंपनी के आर्थिक सहयोग से शहर मे बनाये गये दो प्रमुख स्थानो पर फव्वारे सर्कल इन दिनो नगरपालिका के रहमो करम से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे है।शहर के सौन्दर्य को सीवरेज के ठेकेदारो ने यू भी नेस्तानाबूद कर रखा है,और सौन्दर्यकरण के प्रतीक के रूप में अपनी दुर्दशा का दंश झेल रहे मुख्य प्राईवेट बस स्टेण्ड एवं मेड़ता चौराहा के यह सर्कल नगरपालिका की उदासिनता के कारण लम्बे समय से बंद पड़े है,हैरत की बात तो यह है कि भौतिक रूप से तो यह फव्वारे भले ही अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे है,लेकिन सरकारी दस्तावेजो में यह अनवरत चल रहे है,यानि कागजो मे इनका बजट बकायदा उठ रहा है।पिछले दिनो इन सर्कलो के आवश्यक रख रखाव एवं उनको सुचारू रूप से चलाने के लिए बकायदा सरकारी स्तर पर टेण्डर भी हुए और किसी कर्मयोगी ठेकेदार के नाम यह ठेका भी हो गया,मगर इन दोनो सर्कलो की दशा मे फिलहाल मुझे तो अभी तक कोई सुधार इनमे दिखाई नही दे रहा है,लेकिन मेरे नगरपालिका के मुखबीरो का दावा है कि कागजो मे यह चलने लगे है।गत वर्ष भी इन सर्कलो का कुछ इस तरह से ही किसी भाग्यशाली ठेकेदार के नाम ठेका हुआ था,यह दिगर बात है कि गत साल भी यह फव्वारे आकर्षक दूधिया रोशनी के बीच कागजो मे खूब चले थे,मगर भौतिक रूप से भले ही नही चले हो।शहर की खुबसुरती मे चार चांद लगाने वाले इन सर्कलो की वर्तमान मे दशा यह हो गई है कि मेरे जैसे अनाड़ी कलमकार को दिन के समय मे इनकी खूबसुरती की फोटो सूट करने मे भी पसीने छूट रहे थे।पसीने इसलिए छूट रहे थे कि इनकी फोटो सूट करने मे दिन के समय भारी दिक्कत होती है।दिन मे तो इनके इर्द गिर्द हाथ ठेले और खोमचे वाले इतने खड़े रहते है कि बस स्टेण्ड का यह सर्कल नजर ही नही आता...शहर के जागरूक लोगो की यह मांग है की नगरपालिका इन दोनो फव्वारे सर्कलो को कागजो मे चलाने की बजाय इस गर्मी के मौसम मे कुछ देर के लिए तो शुरू करो...।चलते चलते अपन भी यही कहेगे की जनाब की यह फव्वारे इस गर्मी मे नही चलाएगे तो क्या सर्दीयो मे चलाओगे....9413063300 khanib786@gmail.com

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