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एक गांव ऐसा भी जहां लोग करते है शीतल जल पिलाने की मनुहार...!

(-आईबीखान, समदोलाव-मेडता मार्ग से)
मारवाड़ की अपयाणत एवं यहां के लोग व्दारा की जाने वाली मान मनुहार न केवल अपने देश मे बल्कि अपयाणत की ख्याति सात समुद्र पर चर्चित है।मारवाड़ की लोक कला संस्कृति एवं यहां के लोगों के स्नेह को पाकर देशी-विदेशी मेहमान मारवाड़ मे फिर से आने की उम्मीद रखता है।
मारवाड़ की इसी परम्परा का आज भी कई गांव ऐसे है जो आधुनिक एवं भौतिकता के इस दौर मे अपने गांव मे आने वालो की अपने ही अंदाज मे मनुहार कर लोगों को कायल कर रहे है।
जी हा मे बात कर रहा हू आज नागौर जिले के रियाबडी पंचायत समिति के अधिन समदोलाव गांव की जो की मेडता-जैतारण प्रमुख मेघा हाईवे पर बसा हुआ है।इस गांव के लोग पिछले कई वर्षों से प्रमुख सडक किनारे लगे एक बरगद के पेड के नीचे पक्के चबूतरे पर इस मार्ग से निकलने वाले हर राहगीर को यहां बिना पानी पिलाए आगे जाने नहीं देते।इतना ही नहीं विशाल बरगद की ठण्डी छाव मे लोग सैकड़ों मटके शीतल जल के भरकर अलसुबह ही रख देते है जहां इस मार्ग से निकलने वाले वाहनों, बसों, दुपहिया वाहन इत्यादि पर सवार अनजान राहगीरों को यहां लोग रोककर उनके लिए शीतल जल पीने की मनुहार करते है।मनुहार का आलम यह है की इस मार्ग से गुजरने वाली हर यात्री बस को दस मिनट के लिए अनिवार्य रूप से रोकना पडता है ताकि बस मे सवार सभी यात्री समदोलाव के शीतल जल से अपने हल्क तर कर सके।इतना ही नहीं समदोलाव गांव मे एक गांवाई तालाब भी आया हुआ है जहां ग्रामीण इस तालाब मे बरसात का आने वाले पानी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए तालाब क्षेत्र मे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही इस तालाब की परिधि मे खुले मे कोई शौच न करें, इसके लिए बकायदा चेतावनी बोर्ड लगा रखा है।शनिवार को इस कलमकार को मेडता जाने का मौका मिला जहां ग्रामीणों व्दारा आते-जाते समय हमें रोककर शीतल जल पिलाया... उल्लेखनीय है कि मारवाड़ मे इन दिनों प्रचण्ड गर्मी एवं लू का खासा प्रकोप है,ऐसी स्थिति मे समदोलाव गांव के लोगों की राहगीरों के लिए शीतल जल पिलाने की जो अनुटी परम्परा चला रहे है,इस परम्परा से अन्य गांव के लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए...9413063300

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