आखिर क्यों नहीं चाहते है जैतारण के जनप्रतिनिधि शहर का विकास...!
आईबीखांन, जैतारण की कलम से
आम अवाम अपने क्षेत्र की जन समस्याओं एवं विकास कार्य करवाने के लिए आमतौर पर योग्य व्यक्ति को चुनावों मे जनता के सेवक के रूप मे चुनाव जीताकर भेजती है,लेकिन उन जनप्रतिनिधियों व्दारा राज्य सरकार स्वीकृति विकास कार्यों को अस्वीकृत करवाने की सामुहिक रूप से लिखित मे देकर स्वीकृत कार्यों को निरस्त करवाने की मांग करे तो यह कतई उचित नहीं है।
दरअसल जैतारण नगरपालिका मे पिछले दिनों मुख्यमंत्री बजट घोषणा के अनुसार अपनी जैतारण नगरपालिका परिक्षेत्र के विभिन्न वार्डों मे विकास कार्य करवाने के लिए तकरीबन साढे चार करोड़ रूपये स्वीकृत किये।उक्त राशि से शहर के बीस ही वार्डों मे विकास करवाने के लिए बकायदा शहरी मुख्याजी सहित पालिका के हुक्मरानों ने न केवल निविदाएं जारी कर दी,बल्कि कार्य शुरू करने की तैयारियां शुरू होने से पहले ही एक सियासी खेल ने सवा चार करोड़ के विकास कार्यों पर शहरी निकाय के सतापक्ष के माननीय सदस्यों ने यह आपत्ति प्रकट करते हुए इन सभी स्वीकृत कार्यों को निरस्त करने की यह मांग करते एक सामुहिक पत्र तैयार कर लिख दिया की बोर्ड की बिना सहमति लिए यह विकास कार्य हो रहे है।माफ करना जनाब आप जो तर्क दे रहे है,क्या मुख्याजी को इसकी जानकारी नहीं थी, उन्होंने बकायदा टेण्डर प्रक्रिया पर दस्तखत किये थे,क्या उनको पता नहीं था... खैर यह भी छोडिये इससे पहले इसी शहरी निकाय मे बहुतरे ऐसे कार्य अब भी हुए है और पहले से भी होते आए है।ऐसे हुए कार्यों की इस अनाडीकलमकार के पास दर्जनों ऐसी नजीरे है जिनकी फरहस्त लंबी चौडी है।यहां यह उल्लेखनीय है कि जैतारण शहरी आवाम विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर आए दिन प्रर्दशन कर रही है और यहां शहरी निकाय के सत्तापक्ष तकरीबन 14 सदस्य इन कार्यों को निरस्त करने की मांग कर रहे है,और तो और जिन्होंने टेण्डर एवं निविदाओं पर अपने दस्खत किये वो मुख्याजी भी इन कार्यों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग कर रहे।हालांकि अपने वार्डों मे विकास कार्य न होने तथा वार्डवासियों व्दारा अपने वार्ड के जनप्रतिनिधियों को कौसने पर विकास कार्य निरस्त करने के पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले माननीय जनप्रतिनिधियों के मन मे पीडा उत्पन्न होने लगी है की उन्होंने ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। सत्तापक्ष के एक जनप्रतिनिधि ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया की उनके पास पिछले दिनों मुख्याजी के मुख्याजी वो पत्र लेकर आए थे जिन्होंने उस पर हस्ताक्षर करवाने का आग्रह किया और मैने कर दिया।यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि साढे चार करोड़ के स्वीकृत कार्यों मे से अधिकतर कार्य सत्तापक्ष के माननीय सदस्यों के वार्ड के थे,लेकिन पर्दे के पीछे चुनावी सियासत का खेल खेलने वाले शायद शहर का विकास नहीं चाहते।एक अनाडीकलमकार होने के नाते अपना यह अनुभव रहा है की सरकारें आती और जाती रहती है,लेकिन विकास के कार्यों मे ऐसी राजनीति करना अच्छी बात नहीं है।इधर शहरी निकाय के मुख्य हुक्मरान ने बताया की माननीय 14 सदस्यों एवं अध्यक्षा के उपरोक्त कार्यों को निरस्त करवाने का पत्र मिलने के बाद उन्होंने भी राज्य सरकार को विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा मे स्वीकृत साढे चार करोड़ वापस लेने का राजकीय पत्र सरकार एवं डीएलबी को भेज दिया है।शहरी निकाय के मुख्य हुक्मरान की माने तो इन साढे चार करोड़ की राशि से शहर के विभिन्न भागों मे विकास कार्य हो सकते थे,लेकिन माननीय सदस्यो के विकास नहीं चाहने पर उन्होंने उक्त राशि अन्य नगरपालिका मे भेजने के लिए भी लिखा है।जैसा की उन्होंने बताया की अब आने वाले कई समय तक शहर का विकास अवरुद्ध ही रहेगा, क्योंकि शहरी निकाय के पास विकास के लिए फूटी कौडी भी नहीं है।विकास के नाम पर अब एकमात्र सीवरेज ही जैतारण मे आसरा है,लेकिन सीवरेज का कार्य भी अब अंतिम दौर मे है।शहरी निकाय के कई माननीय सदस्यों की अब जब अपने वार्ड की समस्या लेकर शहरी हुक्मरान के पास जाते है तो हुक्मरान उन्हें उस पत्र की माननीय सदस्यों को याद दिलाने से नहीं चूकते... चलते चलते एक अनाडीकलमकार होने के नाते यही कहूंगा की शहर के विकास मे ऐसी राजनीति अच्छी नहीं है,राजनीति करने के अन्य विकल्प और भी है।9413063300
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