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व्यक्ति को समय के साथ हमेशा चलना चाहिए:सुकनमुनि


जैतारण,26 सितंबर(आईबीखांन)।
जैतारण पावनधाम मे चातुर्मास कर रहे जैन संत प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने बुधवार को मरूधरकेसरी सभागार मे अपने प्रवचनों मे कहा की व्यक्ति को हमेशा समय की किमत समझकर समय के साथ चलना चाहिए।उन्होंने कहा की जो समय चला गया वो समय कभी भी लौटकर नहीं आता।उन्होंने कहा की जो व्यक्ति समय के साथ नहीं चलता, समय उसके न तो साथ रहता है न ही उसका इंतजार करता है।उन्होंने कहा व्यक्ति के लिए जीवन मे सुख दुख आते जाते रहते है,अतः सुख के समय मे व्यक्ति को न तो सुखी होना चाहिए और दुख के समय अधिक दुखी होने की जरूरत नहीं है।
उपप्रवर्तक अमृतमुनि महाराज ने कहा की समय बडा बलवान होता है।समय को किसी सीमा मे बांधा नहीं जा सकता।उन्होंने कहा की समझ का कालचक्र हमेशा घूमता रहता है।उन्होंने कहा की जिसनें समय को समझ लिया वो व्यक्ति जीवन के मूल्यों को समझ जाता है।मनुष्य को जीवन मे कभी अच्छे एवं बुरे समय पर घमंड नहीं करना चाहिए।उन्होंने कहा की समय का हमेशा सदपयोग करना चाहिए।
युवा महेशमुनि ने कहा कि इतिहास इसका गवाह है कि समय व्यक्ति के लिए कभी भी एक जैसा नहीं रहता है।उन्होंने महाभारत का वर्णन करते कहा की युदिष्टर जैसा चक्रवर्ती सम्राट एक राजा के यहां कंक बना तो उसकी महारानी द्रौपदी को शैलेन्दी तक बना सकता है,लेकिन उन्होंने भी समय के दुख को झेलकर अच्छे समय का इंतजार किया।उन्होंने कहा की व्यक्ति को समय के साथ धर्म ध्यान, दान,तप करने का संकल्प लेना चाहिए।इस अवसर पर राकेशमुनि, हरीशमुनि, हितेशमुनि, अखिलेशमुनि एवं डाँ. वरूणमुनि महाराज ने भी धर्मसभा मे उपस्थित लोगों को धर्म एवं संयम पथ पर चलने का आव्हान किया।इस अवसर पर गुरूभक्तो का गुरूश्री रूपसुकन चातुर्मास व्यवस्था समिति के *चैयरमैन,भामाशाह मोहनलाल गढवाणी, माणकराज डागा,तख्तराज लोढा,प्रदीप डागा* व्दारा गुरूश्री के समक्ष जीवदया एवं मानव कल्याण के लिए दान की घोषणा करने वाले भामाशाहों का बहुमान किया।
फोटो कैप्शन:26जे.टी.एन.1
जैतारण पावनधाम मे आयोजित प्रवचन सभा मे बोलते श्री मोहनलाल गढवाणी
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