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काश मुख्याजी जांच मांग कि पहले करते तो बात कुछ और होती...!


(आईबीखांन, जैतारण की कलम से) जैतारण शहरी निकाय परिक्षेत्र मे लगभग 37 किलोमीटर सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य जैसे तैसे पूर्ण होकर अब इस बडी परियोजना का विधिवत उद्घाटन करवाने के शहरी निकाय के हुक्मरानों व्दारा शुभ मुर्हूत निकलवाने की अंतिम तैयारियां शुरू कर दी गई है।इस अनाडीकलमकार को यह बताने की पाठकों को शायद यह आवश्यकता नहीं होगी की मैंने शहरी निकाय क्षेत्र मे बेतरतीब चलने वाले सीवरेज के उल्लेखनीय कार्यो पर पानी पी पीकर जमकर लिखा और लिखता रहूंगा, लेकिन अब जब इस कार्य का उद्घाटन एवं विधानसभा के चुनाव नजदीक आए तो शहरी निकाय के मुख्याजी सीवरेज के कार्यों की गुणवत्ता की जांच की मांग कर रहे है,लेकिन वे मांग करके यह भूल रहे है कि जब कार्य का निर्माण हो रहा था और शहरी आवाम सीवरेज के उल्लेखनीय कार्यो से आहत थी,तब आप जांच करवाने के लिए आगे क्यों नहीं आए।जबकि यह आपके अधिकार क्षेत्र मे था।उस समय लोग सीवरेज पर सवालिया निशान लगा रहे थे,तब आप मौन रहे।यही नहीं आपको याद होगा या न होगा, लेकिन मे मुख्याजी की याद ताजा कर देता हूं की 21जुलाई 2017 को आपकी सदारत मे आयोजित शहरी निकाय की साधारण सभा की बैठक मे सत्तापक्ष एवं विपक्षी सदस्यों ने एकराय होकर न केवल सीवरेज के कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाया, अलबत्ता उस बैठक मे सीवरेज को लेकर सदन मे जमकर हंगामा भी हुआ, हंगामा इस तरह हुआ की आपके निकाय के कुछ माननीय सदस्यों ने इसको लेकर न केवल बखेड़ा खडा किया, लेकिन उस समय आपने सीवरेज वालों को बुलाकर मात्र औपचारिकता पूरी कर आक्रोशित सदस्यों को शांत किया।अब जब लोकप्रिय समाचार पत्र पत्रिका व्दारा जैतारण सीवरेज के कार्यों की सिलसिलेवार परत दर परतें खौलने लगा तो आप सीवरेज के कार्यों की गुणवत्ता से अपने आप को अलग कर यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हो की हमें तो पता ही नहीं की सीवरेज का कार्य की गुणवत्ता उचित नहीं है।मेरी बात भले ही कडवी लग रही होगी, लेकिन यह भी तो सच है की सीवरेज के ठेकेदार को अबतलक जो भी भुगतान हुआ उस भुगतान राशि पर शायद हस्ताक्षर आपने भी तो किये ही होगे।अब पत्रिका व्दारा जब इसका मामला उठाया जा रहा है तो आप जांच की मांग कर रहे हो..!आप चाहते तो ठेकेदार का भुगतान रोक सकते थे, लेकिन उस समय की बात अलग थी। लोकप्रिय अखबार व्दारा सीवरेज विषय पर अब लिख रहा है जबकि मैने तो जैतारण सीवरेज की गुणवत्ता पर लिख लिखकर अपने मोबाइल की गुणवत्ता तक बिगाड़ दी,लेकिन उस वक्त मेरी लेखक शैली शहरी निकाय के हुक्मरानों एवं स्वयं मुख्याजी को अखरती थी।हालांकि मे कोई इस ब्लॉग मे शहरी निकाय के हुक्मरानों एवं माननीय मंत्रीजी का बचाव नहीं कर रहा हूं।माननीय मंत्रीजी की भी यह जिम्मेदारी थी की वे अपने क्षेत्र मे करोड़ों रूपयों की लागत से बनने वाले सीवरेज जैसे पायलट प्रोजेक्ट पर अपनी मोनिटरिंग रखते, लेकिन उन्होंने भी कभी दखल नहीं दी।खैर अब जब सीवरेज को लेकर शहरी निकाय व्दारा उघाटन की तैयारियां शुरू कर दी और कार्य पूर्ण होने को है तो मुख्याजी सहित दिगर लोग सीवरेज के कार्यों की गुणवत्ता की जांच की मांग कर रहे है।जबकि सुना तो यह गया हैं की सीवरेज के कार्य की लोकायुक्त व्दारा इसकी जांच की जा चुकी है।यही नहीं जब लोकायुक्त मे सीवरेज की गुणवत्ता की जांच विचाराधीन थी और शहरी निकाय के हुक्मरानों ने सीवरेज ठेकेदार का जांच पूरी होने तक भुगतान रोका गया था...शायद आपको याद है या नहीं, लेकिन उस अधूरी जांच के बीच आपने ठेकेदार को बकाया भुगतान करने की चिट्ठी तक शहरी निकाय के अधिकारियों को भी लिखी थी...चुकी अब जब जांच की मांग उठी तो मुख्याजी भी यही मांग करने लगे...चलते चलते अपने तो यही कहेंगे की जांच की मांग तो एक बहाना है,असल मे इसके उघाटन को अटकाना है।काश जांच एवं इसकी गुणवत्ता पर मुख्याजी पहले ध्यान देते तो आज यह स्थिति नहीं होती, खैर वो दौर रस्मों रिवाजों का दौर रहा होगा...9413063300

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