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तप से बड़ी कोई साधना नहीं:सुकनमुनि


जैतारण,(आईबीखांन)। श्री मरूधरकेसरी पावनधाम मे चातुर्मास कर रहे जैन संत प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने रविवार को मरूधरकेसरी सभागार मे चातुर्मास प्रवचन करते कहा की तप से बड़ी कोई साधना नहीं है।उन्होंने कहा कि त्याग एवं तप तपस्या करना बहुत कठिन कार्य है,लेकिन जो व्यक्ति इसके लिए संकल्प करता है उसके लिए मुश्किल नहीं है।उन्होंने कहा की तप तपस्या करने से आत्मा की शुद्धि होतीं है और प्रभु की आराधना भी पूरी होती है।उन्होंने कहा की व्यक्ति को जीवन मे हमेशा त्याग, तपस्या, दयाभाव रखने का संकल्प लेना चाहिए।उन्होंने कहा की भगवान महावीर ने भी अपने जीवन मे घोर तपस्या की थी।उपप्रवर्तक अमृतमुनि महाराज ने कहा की मनुष्य को खुद के लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए जीना चाहिए।उन्होंने कहा की जो व्यक्ति दूसरों के लिए जीकर मृत्यु को प्राप्त करता है उसे दुनिया मरने के बाद भी याद करती है।जो व्यक्ति दूसरों के दुखों को अपना दुख समझकर उसे दूर करने का प्रयास करता है वो व्यक्ति जीवन मे हमेशा आगे बढता है।उन्होंने कहा की मनुष्य जीवन कदाचित बार बार नहीं मिलता अतः इस मनुष्य रूपी जीवन को सही अर्थों मे जीना सीखें।युवा मुकेशमुनि ने कहा की संयम पथ पर चलना बडा कठिन कार्य है।जिसने संयम पथ पर चलना सीख लिया उसके जीवन का कल्याण हो जाता है।उन्होंने कहा आज के दौर मे व्यक्ति माया के पीछे भाग रहा है,लेकिन एक दिन वो आएगा जब माया यही रह जाएगी।उसके साथ उसके पुण्य के कार्य साथ जाएंगे।इस अवसर पर युवा महेशमुनि, हरीशमुनि, अखिलेशमुनि एवं डाँ. वरूणमुनि महाराज ने भी अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म ध्यान पर जोर दिया।इस अवसर पर गुरूश्री रूपसुकन चातुर्मास व्यवस्था समिति के चैयरमैन मोहनलाल गढवाणी, माणकराज डागा, तख्तराज लोढा, महावीर लोढा, लूणकरण जैन,प्रदीप डागा, ललित जैन पाटवा इत्यादि ने प्रवचन सभा मे जीवदया एवं मानव कल्याण के लिए दान करने वाले भामाशाहों का बहुमान किया गया।प्रवचन सभा मे बडी संख्या मे श्रावक एवं श्राविकाओं ने भाग लेकर गुरू वंदना की गई।9413063300

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